हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। हर माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सायंकाल के प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत के प्रभाव से जीवन के दुख, कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रदोष व्रत विशेष रूप से शिव भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत को करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यही कारण है कि प्रत्येक माह शिव भक्त इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से करते हैं।
प्रदोष व्रत 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 31 दिसंबर 2025, बुधवार को रात्रि 1 बजकर 48 मिनट पर होगा। वहीं, त्रयोदशी तिथि का समापन 1 जनवरी 2026, गुरुवार को रात्रि 10 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, वर्ष 2026 का पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी, गुरुवार के दिन रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार के दिन शिव पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 1 जनवरी 2026 को प्रदोष काल सायंकाल 4 बजकर 55 मिनट से लेकर 6 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में भगवान शिव की पूजा और आरती करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात घर के पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। एक चौकी पर साफ वस्त्र बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग की स्थापना करें।
इसके बाद गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करें। यदि संभव हो तो इस दिन रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अभिषेक के पश्चात शिवलिंग पर अक्षत, पुष्प, चंदन, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। सायंकाल प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और आरती करें तथा अंत में भगवान को भोग अर्पित करें। मान्यता है कि इस विधि से प्रदोष व्रत करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट हर लेते हैं और जीवन में सुख, शांति व सफलता प्रदान करते हैं।