फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज प्रेम, सौभाग्य और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ पर्व माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल द्वितीया तिथि 18 फरवरी को शाम 4 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होकर 19 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार फुलेरा दूज 19 फरवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा।
यह पर्व विशेष रूप से राधा-कृष्ण की आराधना को समर्पित है और इसे वैवाहिक जीवन में मधुरता, प्रेम संबंधों में स्थिरता तथा दांपत्य सुख की वृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिन इतना शुभ है कि कई लोग बिना पंचांग देखे भी विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्य प्रारंभ कर देते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का प्रभाव दीर्घकाल तक सकारात्मक रहता है।
फुलेरा दूज की पूजन विधि
इस दिन प्रातः या संध्या के समय स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सुगंधित पुष्पों से उनका श्रृंगार करें तथा अबीर-गुलाल अर्पित करें। प्रसाद में सफेद मिठाई, पंचामृत, माखन-मिश्री या मिश्री चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘मधुराष्टक’ या ‘राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र’ का पाठ करें। यदि संभव न हो तो श्रद्धा से ‘राधे-कृष्ण’ नाम का जप करें। अंत में श्रृंगार सामग्री का दान कर प्रसाद ग्रहण करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
फुलेरा दूज के दिन घर में सात्विक भोजन ही ग्रहण करें और मांस, मदिरा तथा तामसिक पदार्थों से दूर रहें। मन में किसी के प्रति द्वेष या कटुता न रखें, क्योंकि यह दिन प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। घर के द्वार पर आने वाले किसी भी व्यक्ति का सम्मान करें। बुजुर्गों और बच्चों के साथ विनम्र व्यवहार करें। इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से भी परहेज करना शुभ माना गया है।
फुलेरा दूज केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में प्रेम, सामंजस्य और आध्यात्मिक मधुरता का संदेश देने वाला पावन अवसर है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया पूजन निश्चित ही सुख-समृद्धि और आनंद का मार्ग प्रशस्त करता है।