Friday, 26 Jun 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > आरती/मंत्र > निर्जला एकादशी 2026 : व्रत कथा, महत्व, एकादशी माता व श्रीहरि आरती
आरती/मंत्र

निर्जला एकादशी 2026 : व्रत कथा, महत्व, एकादशी माता व श्रीहरि आरती

दिव्यसुधा
Last updated: June 25, 2026 11:15 am
दिव्यसुधा
Share
निर्जला एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु, व्रत कथा, एकादशी माता आरती और श्रीहरि आरती का धार्मिक दृश्य
निर्जला एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की आराधना और एकादशी माता व श्रीहरि की आरती का दिव्य महत्व
SHARE

सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। वर्षभर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है और इसे सबसे कठिन तथा सबसे अधिक पुण्य देने वाला व्रत माना जाता है। “निर्जला” का अर्थ है बिना जल के। इस दिन श्रद्धालु अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग कर भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना करते हैं।

Contents
एकादशी माता की आरतीश्रीहरि की आरती

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, मंत्र जाप, दान-पुण्य, कथा श्रवण और आरती का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

निर्जला एकादशी आत्मसंयम और तपस्या का भी संदेश देती है। यह व्रत केवल भोजन और जल का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी प्रतीक है। इस दिन भक्त भगवान श्रीहरि से अपने जीवन में धर्म, सदाचार और भक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

विशेष रूप से निर्जला एकादशी पर एकादशी माता की आरती और श्रीहरि की आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। आरती के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा, समर्पण और प्रेम को भगवान के चरणों में अर्पित करता है। कहा जाता है कि सच्चे मन से आरती गाने और सुनने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


एकादशी माता की आरती

ऊं जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ऊं।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।। ऊं।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ऊं।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ऊं ।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ऊं ।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ऊं ।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ऊं ।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ऊं ।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ऊं ।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ऊं ।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ऊं ।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ऊं ।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ऊं ।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ऊं ।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।।

श्रीहरि की आरती

ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ऊं जय…॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ऊं जय…॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ऊं जय…॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ऊं जय…॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ऊं जय…॥

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ऊं जय…॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ऊं जय…॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ऊं जय…॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ऊं जय…॥

TAGGED:aartiDevotional Contentekadashihindu festivalIndian CulturereligionSanatan DharmaSpiritualVishnu BhaktiVrat Katha
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 26 जून 2026 राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए दैनिक भविष्यफल 25 जून राशिफल 2026: सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल और ज्योतिष भविष्यवाणी
Next Article अयोध्या रामायण वैक्स म्यूजियम, श्रीराम कथा जीवंत दृश्य अयोध्या में खुला रामायण वैक्स म्यूजियम, त्रेतायुग का मिलेगा दिव्य अनुभव
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए भक्त सूर्य देव की पूजा कर रहा है
आरती/मंत्र

आदित्य हृदय स्तोत्र: सूर्य उपासना से प्राप्त करें सौभाग्य, ऊर्जा और सफलता

By दिव्यसुधा
मां लक्ष्मी की आराधना करते हुए भक्त श्रीसूक्त पाठ करते हुए – शुक्रवार को धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए
आरती/मंत्र

श्रीसूक्त पाठ: हर शुक्रवार करें पाठ, दूर होगी दरिद्रता और बढ़ेगा धन-समृद्धि

By दिव्यसुधा
hanuman
आरती/मंत्र

श्री हनुमान जी की आरती

By दिव्यसुधा
गुरु प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा करते श्रद्धालु
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

गुरु प्रदोष व्रत 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा और शिव कृपा के उपाय

By Ekta Mishra
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?