नई दिल्ली: भारत की सांस्कृतिक विरासत में धर्म, प्रकृति और परंपराएं एक-दूसरे में इस प्रकार रची-बसी हैं कि यहां सिर्फ मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और प्रकृति की शक्तियों को भी देवतुल्य माना गया है। इन्हीं मान्यताओं का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है “नाग पंचमी”, जो श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 29 जुलाई 2025, मंगलवार को आ रहा है।
नाग पंचमी का महत्व:
नाग पंचमी विशेष रूप से नागों (साँपों) की पूजा का पर्व है। हिन्दू धर्म में नागों को शक्ति, संरक्षण और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव के गले में वासुकि नाग, शेषनाग पर विश्राम करते भगवान विष्णु, और कृष्ण द्वारा कालिया नाग पर विजय जैसे कई पौराणिक प्रसंग नागों की दिव्यता को दर्शाते हैं।
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन नाग देवता को दूध अर्पित करने, मंत्र जाप करने और व्रत रखने से व्यक्ति को कालसर्प दोष, सर्प भय, रोग, और आकस्मिक मृत्यु से मुक्ति मिलती है। यह पर्व जीवन में सुरक्षा, शांति और समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है।
प्रकृति से जुड़ी एक आध्यात्मिक परंपरा:
नाग पंचमी केवल धार्मिक नहीं, बल्कि प्राकृतिक संरक्षण का संदेश भी देती है। साँप पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा होते हैं। खेतों में फसल बचाने से लेकर चूहों की संख्या नियंत्रित करने तक, उनका पर्यावरण में विशिष्ट स्थान है। नाग पंचमी हमें यह भी याद दिलाता है कि हमें प्रकृति के हर जीव का सम्मान करना चाहिए, चाहे वह भयावह क्यों न दिखे।
पूजा विधि और परंपराएं:
- इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत रखा जाता है।
- दीवार या जमीन पर गोबर या गेरू से नागों की आकृति बनाई जाती है या फिर मिट्टी की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
- उन्हें दूध, अक्षत (चावल), पुष्प, दूर्वा, और हल्दी-कुमकुम अर्पित किया जाता है।
- महिलाएं विशेष रूप से नाग पंचमी का व्रत करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
कई स्थानों पर जीवित नागों को भी दूध पिलाने की परंपरा है, हालांकि वन्य जीव विशेषज्ञ इस प्रथा को हानिकारक मानते हैं। अब कई लोग सांपों की पूजा प्रतीकात्मक रूप से करते हैं।
कहां-कहां मनाया जाता है?
- उत्तर भारत: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान में घरों और मंदिरों में पूजा होती है।
- महाराष्ट्र व कर्नाटक: गांवों में पारंपरिक मेलों और नाग मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं।
- दक्षिण भारत: केरल और तमिलनाडु में नाग पूजा विशेष महत्व रखती है, जहां नागों के मंदिर और वृक्षों के पास पूजा की जाती है।
- नेपाल और बांग्लादेश: हिन्दू संस्कृति से जुड़े क्षेत्रों में नाग पंचमी श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है।
वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण:
विशेषज्ञों का मानना है कि नाग पंचमी जैसे पर्व हमारे जीवन में प्राकृतिक संतुलन, जैव विविधता और मानवीय करुणा का संदेश देते हैं। यह सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक चेतना है जो प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देती है।