Saturday, 28 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > मुख्य द्वार से आती है घर की सकारात्मक ऊर्जा: जानें वास्तु के सरल आध्यात्मिक उपाय
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

मुख्य द्वार से आती है घर की सकारात्मक ऊर्जा: जानें वास्तु के सरल आध्यात्मिक उपाय

Ekta Mishra
Last updated: February 27, 2026 12:45 pm
Ekta Mishra
Share
वास्तु अनुसार सजे घर के मुख्य द्वार पर तोरण, दीपक और हरियाली के साथ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश
वास्तु अनुसार सजा मुख्य द्वार घर में लाता है सुख, शांति और समृद्धि
SHARE

घर का मुख्य द्वार केवल आने-जाने का मार्ग नहीं होता, बल्कि यह पूरे घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यही वह स्थान है जहां से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की शक्तियां घर में प्रवेश करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि मुख्य द्वार संतुलित, स्वच्छ और आकर्षक हो, तो घर में सुख, शांति और समृद्धि का प्रवाह निरंतर बना रहता है। इसलिए प्रवेश द्वार को विशेष महत्व देना आवश्यक है।

स्वच्छता और प्रकाश का विशेष महत्व
वास्तु में मुख्य द्वार के आसपास स्वच्छता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्रवेश स्थान पर धूल, कचरा, टूटे-फूटे सामान या जूते-चप्पलों का ढेर नहीं होना चाहिए। ऐसा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को रोक देता है और नकारात्मकता को बढ़ावा देता है। साफ-सुथरा और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर में शुभ ऊर्जा का स्वागत करता है।

प्रकाश भी उतना ही आवश्यक है। शाम के समय मुख्य द्वार पर पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। दोनों ओर दीपक, सुंदर लैंप या हल्की गर्म रोशनी लगाने से वातावरण पवित्र और आमंत्रित करने वाला बनता है। हल्की पीली रोशनी सौम्यता और अपनापन बढ़ाती है, जिससे घर में प्रवेश करते ही मन को सुकून का अनुभव होता है।

शुभ चिह्न और तोरण की आध्यात्मिक शक्ति
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ या शुभ-लाभ जैसे मंगलकारी चिह्न बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये प्रतीक सकारात्मक स्पंदनों को आकर्षित करते हैं और घर में शुभता का संचार करते हैं। आम, अशोक या केले के पत्तों का तोरण लगाने की परंपरा भी इसी कारण से प्रचलित है, क्योंकि यह प्रकृति की ऊर्जा और ताजगी का प्रतीक है।

त्योहारों या विशेष अवसरों पर रंगोली बनाना भी शुभ फलदायी होता है। प्राकृतिक और सौम्य रंगों से सजी रंगोली न केवल सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि घर के वातावरण को आनंद और उत्साह से भर देती है।

द्वार का रंग, डिजाइन और मजबूती
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार मजबूत और सुदृढ़ होना चाहिए। लकड़ी का दरवाजा विशेष रूप से शुभ और स्थायित्व का प्रतीक माना गया है। दिशा के अनुसार रंग चुनना भी लाभकारी होता है पूर्व दिशा में हल्का हरा या भूरा, उत्तर में हल्का नीला, दक्षिण में गहरा भूरा और पश्चिम में क्रीम या सफेद रंग शुभ माने गए हैं। साथ ही, साफ और आकर्षक नेमप्लेट घर की प्रतिष्ठा और सकारात्मक पहचान को दर्शाती है। यह छोटी सी चीज भी ऊर्जा संतुलन में योगदान देती है।

हरियाली और सुगंध से बढ़ाएं सकारात्मकता
मुख्य द्वार के पास हरियाली रखना अत्यंत लाभकारी माना गया है। तुलसी, मनी प्लांट या छोटे सजावटी पौधे प्रवेश स्थान को जीवंत और ऊर्जावान बनाते हैं। मौसम के अनुसार छोटे गमलों में ताजे फूल सजाने से एंट्रेंस और भी मनमोहक हो जाता है। यदि जगह कम हो, तो हैंगिंग पॉट्स या सीढ़ियों के पास सजे गमले रखे जा सकते हैं। साथ ही, चंदन, गुलाब या मोगरा जैसी हल्की प्राकृतिक सुगंध वातावरण को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखती है।

दरवाजे की दिशा और खुलने का तरीका
वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए, जिससे ऊर्जा का प्रवाह सहज रूप से घर में प्रवेश करे। दरवाजा खुलते समय किसी प्रकार की आवाज या रुकावट नहीं होनी चाहिए। चरमराहट या अटकने की समस्या को तुरंत ठीक कराना चाहिए, क्योंकि इसे जीवन में बाधाओं का संकेत माना जाता है।

जब मुख्य द्वार स्वच्छ, सुव्यवस्थित, प्रकाशमय, सुगंधित और हरियाली से सुसज्जित होता है, तो वहां से प्रवेश करने वाली ऊर्जा भी सकारात्मक और मंगलकारी होती है। ऐसे छोटे-छोटे उपाय घर को केवल सुंदर ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से समृद्ध और शांतिपूर्ण भी बनाते हैं।

TAGGED:आध्यात्मिक जीवनघर के वास्तु टिप्सप्रवेश द्वार सजावटमुख्य द्वारवास्तु टिप्सवास्तु शास्त्रसकारात्मक ऊर्जासुख-समृद्धि उपायहिंदू परंपरा
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article मणिकर्णिका घाट पर मसान होली के दौरान साधु चिता की भस्म से होली खेलते हुए मणिकर्णिका घाट की मसान होली: जीवन और मृत्यु का अद्भुत आध्यात्मिक उत्सव
Next Article लखनऊ के अर्जुनगंज स्थित मरी माता मंदिर परिसर में टंगी हजारों घंटियां और श्रद्धालुओं द्वारा जलाए गए दीपक। मां का अनोखा दरबार: जहां सिर्फ घंटियां बांधने से पूरी हो जाती हैं मुरादें
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

हथेली में V निशान का अर्थ और भाग्यशाली लोगों के शुभ संकेत
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

हथेली में V का निशान: 35 की उम्र के बाद खुलता भाग्य, हस्तरेखा शास्त्र के शुभ संकेत

By दिव्यसुधा
मणिबंध रेखाएं हाथ की कलाई पर - हस्तरेखा शास्त्र में जीवन संकेत
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

मणिबंध रेखाएं: कलाई की रेखाओं में छिपे जीवन के संकेत

By Ekta Mishra
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

जानें वास्तु अनुसार पेड़-पौधे लगाने की सही दिशा, बदलेगी किस्मत

By दिव्यसुधा
महिला के सुंदर और शुभ पैरों का चित्र, जो लक्ष्मी स्वरूप को दर्शाते हैं
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

महिलाओं के पैरों में लक्ष्मी का स्वरूप: हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार शुभ लक्षण

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?