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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > मृत परिजनों की तस्वीरें घर में कहां लगानी चाहिए? जानें सही दिशा और वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

मृत परिजनों की तस्वीरें घर में कहां लगानी चाहिए? जानें सही दिशा और वास्तु नियम

दिव्यसुधा
Last updated: June 19, 2026 5:14 pm
दिव्यसुधा
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घर की दक्षिण दिशा में सम्मानपूर्वक लगाई गई पूर्वजों की तस्वीरें
पूर्वजों की तस्वीरों के लिए सही दिशा और स्थान का विशेष महत्व माना गया है।
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जब कोई प्रिय व्यक्ति इस संसार को छोड़कर चला जाता है, तो उसकी यादें हमारे जीवन का अमूल्य हिस्सा बन जाती हैं। समय के साथ उसकी वस्तुएं भले ही अलमारी या तिजोरी में सहेज दी जाएं, लेकिन उसकी तस्वीर अक्सर घर की दीवारों पर बनी रहती है। वह तस्वीर केवल एक फोटो नहीं होती, बल्कि उससे जुड़ी भावनाएं, स्मृतियां और रिश्तों की गर्माहट भी होती है। यही कारण है कि अधिकांश लोग अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरों को सम्मानपूर्वक घर में स्थान देते हैं।

सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में भी पूर्वजों के सम्मान को विशेष महत्व दिया गया है। हालांकि, उनके चित्रों को घर में लगाने के लिए कुछ मर्यादाएं और दिशानिर्देश बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।

किस दिशा में लगानी चाहिए पूर्वजों की तस्वीर?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरें घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा की दीवार पर लगाना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसा करने पर तस्वीर में दिख रहे पूर्वजों का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रहता है। शास्त्रों में उत्तर और पूर्व दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और देव शक्तियों की दिशा माना गया है।

मान्यता है कि इस प्रकार तस्वीर लगाने से पितरों का आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। साथ ही परिवार के सदस्यों के मन में अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा भी बनी रहती है।

किन स्थानों पर नहीं लगानी चाहिए तस्वीरें?

मंदिर में नही रखें
गरुड़ पुराण के अनुसार, पूर्वज पूजनीय अवश्य होते हैं, लेकिन उन्हें देवी-देवताओं के समान स्थान नहीं दिया जाता। इसलिए उनकी तस्वीरों को पूजा घर या भगवान की प्रतिमाओं के साथ रखना उचित नहीं माना गया है। इससे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन होता है।

सीढ़ियों और कोनों से बचें
घर की सीढ़ियों के पास या ऐसे कोनों में तस्वीरें लगाना उचित नहीं माना जाता, जहां लोगों का लगातार आना-जाना हो। ऐसी जगहों पर तस्वीरों का सम्मान भी कम होता है और बार-बार नजर पड़ने से व्यक्ति दुखद स्मृतियों में अधिक उलझ सकता है।

जीवित लोगों के साथ संयुक्त तस्वीर न लगाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को मृत परिजन की तस्वीर के साथ एक ही फ्रेम में लगाना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और इसे पारिवारिक सुख-शांति के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

ब्रह्मस्थान और रसोईघर में न लगाएं
घर के मध्य भाग, जिसे वास्तु में ब्रह्मस्थान कहा जाता है, वहां पूर्वजों की तस्वीरें लगाने से बचना चाहिए। इसी प्रकार रसोईघर में भी ऐसी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए। मान्यता है कि इससे पारिवारिक कलह और आर्थिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

तस्वीर लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान
पूर्वजों की तस्वीरें हमेशा सम्मानजनक और स्वच्छ स्थान पर रखें। यदि संभव हो तो उन्हें दीवार पर टांगने के बजाय किसी स्टैंड या शेल्फ पर स्थापित करें। मुख्य द्वार के सामने या ऐसी जगह जहां हर आने-जाने वाले व्यक्ति की सीधी नजर पड़े, वहां तस्वीर लगाने से बचें। साथ ही ऐसी तस्वीर का चयन करें जिसमें पूर्वज प्रसन्न और मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हों। उदास, बीमार या कष्ट में दिखाई देने वाली तस्वीरें घर के वातावरण को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

श्रद्धा और संतुलन का संदेश
सनातन परंपरा हमें पूर्वजों को भूलने की नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और मर्यादा के साथ स्मरण करने की शिक्षा देती है। तस्वीरों का उद्देश्य हमारे जीवन में प्रेरणा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को जीवित रखना है। लेकिन जब हम अतीत की स्मृतियों में अत्यधिक उलझ जाते हैं, तो वर्तमान जीवन की ऊर्जा प्रभावित होने लगती है।

इसलिए आवश्यक है कि हम अपने पितरों को हृदय में स्थान दें, उनकी सीख को जीवन में अपनाएं और उनकी तस्वीरों को भी उचित स्थान और सम्मान प्रदान करें। यही सच्ची श्रद्धांजलि और सनातन संस्कृति का मूल संदेश है।

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