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दिव्य सुधा > अन्य > मार्गशीर्ष अमावस्या: पितृ शांति और पितृ दोष निवारण का अत्यंत शुभ दिन
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मार्गशीर्ष अमावस्या: पितृ शांति और पितृ दोष निवारण का अत्यंत शुभ दिन

दिव्यसुधा
Last updated: November 17, 2025 5:43 pm
दिव्यसुधा
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मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ तर्पण करते श्रद्धालु – पितृ दोष निवारण का शुभ दिन
मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन किए गए तर्पण और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
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हिंदू धर्म में अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है, लेकिन मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ तर्पण, श्राद्ध और पितृ दोष निवारण के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। यह दिन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि परिवार की शांति, समृद्धि और पूर्वजों के आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्वितीय अवसर भी है।

मार्गशीर्ष अमावस्या का शुभ समय

  • तिथि आरंभ: 19 नवंबर सुबह 9:43 बजे
  • तिथि समाप्त: 20 नवंबर दोपहर 12:16 बजे
    इन समयों में पवित्र स्नान, तर्पण और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पितृ दोष क्या है?

ज्योतिष में पितृ दोष को अत्यंत गंभीर दोष माना जाता है जो कुंडली में पूर्वजों की असंतुष्टि या अधूरे कर्मों के कारण बनता है। इसका प्रभाव परिवार की उन्नति, सेहत, धन और संतान सुख तक पर दिखाई देता है। यह केवल एक ग्रहदोष नहीं, बल्कि संकेत होता है कि परिवार को पितरों की कृपा पुनः प्राप्त करने के लिए उचित पूजा, सेवा और कर्म करने की आवश्यकता है।

पितृ दोष के संकेत

यदि घर में निम्न लक्षण लगातार दिखाई दें तो इन्हें पितृ दोष का प्रभाव माना जा सकता है:

  • घर में बार-बार झगड़े, कलह और मानसिक तनाव
  • दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा
  • विवाह योग्य युवाओं के विवाह में लगातार रुकावट
  • धन आने के बाद तुरंत खर्च हो जाना
  • व्यापार या नौकरी में असफलता और नुकसान
  • परिवार के सदस्यों की सेहत में गिरावट, बार-बार बीमारियां
  • अचानक दुर्घटनाएं या अनहोनी
  • घर में नकारात्मक ऊर्जा या मन का बेचैन रहना
    इन संकेतों को लंबे समय तक नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। मार्गशीर्ष अमावस्या जैसे शुभ दिनों में पितृ शांति के लिए किए गए कर्म परिवार में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।

मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ दोष निवारण के उपाय

पवित्र स्नान और तर्पण
सुबह गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर स्नान करें तो जल में गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद – तिल, पुष्प, जल से पितरों का तर्पण करें। यह आत्मा की शांति के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

भगवान विष्णु की पूजा
इस दिन भगवान विष्णु को पीले पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करना अत्यंत शुभ है। पूजा के बाद पितरों की शांति की प्रार्थना करें।

श्राद्ध और पिंडदान
पूर्वजों के नाम से पिंडदान या श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष कम होता है और परिवार में स्थिरता आती है।

दान-पुण्य और ब्राह्मण भोजन

  • ब्राह्मणों को भोजन कराना
  • वस्त्र, अन्न और दक्षिणा देना
    पौराणिक मान्यता है कि ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार को दीर्घकालिक आशीर्वाद मिलता है।

पीपल के नीचे दीपदान
शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि पीपल में पितरों का वास होता है। दीपक के बाद पेड़ की 5 या 7 परिक्रमा अवश्य करें। मार्गशीर्ष अमावस्या पितृ शांति और पितृ दोष निवारण का अत्यंत शक्तिशाली अवसर है। इस दिन किए गए तर्पण, दान और पूजा से न केवल पूर्वज प्रसन्न होते हैं, बल्कि परिवार पर से नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाता है और सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खुलता है।

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