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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार: वास्तु दोष नहीं, सही उपाय से बनेगा शुभ द्वार
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार: वास्तु दोष नहीं, सही उपाय से बनेगा शुभ द्वार

दिव्यसुधा
Last updated: December 15, 2025 4:24 pm
दिव्यसुधा
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दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार के वास्तु उपाय
दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार को शुभ बनाने के वास्तु शास्त्रीय उपाय
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वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यहीं से ऊर्जा का प्रवेश होता है। यह ऊर्जा ही घर के वातावरण, सुख-शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार उत्तर, पूर्व और ईशान दिशा को मुख्य द्वार के लिए अधिक शुभ माना गया है, जबकि दक्षिण दिशा को लेकर अक्सर लोगों के मन में भय और भ्रम बना रहता है। ऐसा माना जाता है कि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा है इसलिए इस दिशा में मुख्य द्वार होना अशुभ हो सकता है।

हालाँकि वास्तु शास्त्र यह भी स्पष्ट करता है कि यदि किसी कारणवश घर का मुख्य दरवाजा दक्षिण दिशा में बन गया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। कुछ सरल और प्रभावी उपायों द्वारा दक्षिण दिशा के अशुभ प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखा जा सकता है।

दक्षिण दिशा में गणेश जी की स्थापना
यदि आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है, तो इस दिशा में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है, जो हर प्रकार की बाधा और नकारात्मकता को दूर करते हैं। दक्षिण दिशा में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से द्वार से प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है। ध्यान रखें कि प्रतिमा स्वच्छ स्थान पर हो और उसकी नियमित रूप से साफ-सफाई की जाए।

स्वास्तिक का पावन चिन्ह बनाएँ
स्वास्तिक को सनातन धर्म में मंगल और शुभता का प्रतीक माना गया है। दक्षिण दिशा की दीवार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रतिदिन या कम से कम सप्ताह में एक बार रोली या हल्दी से स्वास्तिक बनाना विशेष फलदायी होता है। यह छोटा-सा उपाय घर के वातावरण में सकारात्मक कंपन उत्पन्न करता है।

हनुमान जी की कृपा से मिलेगा सुरक्षा कवच
दक्षिण दिशा का संबंध मंगल और ऊर्जा से भी माना जाता है। ऐसे में दक्षिण दिशा में हनुमान जी की आशीर्वाद देने वाली मुद्रा में तस्वीर या पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाना अत्यंत लाभकारी होता है। हनुमान जी को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाला देवता माना गया है। उनकी उपस्थिति से भय, संकट और बाधाएँ दूर होती हैं और घर में साहस व आत्मबल का संचार होता है।

कैक्टस या नागफनी का पौधा
सामान्यतः घर में कैक्टस का पौधा लगाना शुभ नहीं माना जाता, लेकिन दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार होने की स्थिति में यह एक विशेष उपाय के रूप में उपयोगी माना गया है। कैक्टस या नागफनी का पौधा नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। इसे दक्षिण दिशा में लगाने से बाहर से आने वाली नकारात्मक शक्तियाँ घर में प्रवेश नहीं कर पातीं।

बड़े शीशे का उपाय
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है, तो दरवाजे के ठीक सामने वाली दीवार पर एक बड़ा शीशा लगाना चाहिए। मान्यता है कि जैसे ही नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है, वह शीशे से टकराकर वापस लौट जाती है। यह उपाय घर को ऊर्जा संतुलन में रखने में सहायक माना जाता है। ध्यान रखें कि शीशा साफ और बिना टूट-फूट का हो।

दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार होना अपने आप में अभिशाप नहीं है। वास्तु शास्त्र समाधान का शास्त्र है, भय का नहीं। यदि सही उपाय श्रद्धा और नियमपूर्वक किए जाएँ, तो दक्षिण दिशा का द्वार भी घर के लिए शुभ और कल्याणकारी बन सकता है। सकारात्मक सोच, नियमित पूजा और इन सरल वास्तु उपायों के साथ आपका घर भी सुख, शांति और समृद्धि का केंद्र बन सकता है।

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