आंध्रप्रदेश के वीरभद्र स्वामी लेपाक्षी मंदिर में एक ऐसा अद्भुत चमत्कार मौजूद है, जिसने सदियों से लोगों को हैरान किया हुआ है। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि वास्तुकला और प्राचीन विज्ञान का जीवंत उदाहरण है। मंदिर में कुल 70 पत्थर के खंभे हैं, लेकिन उनमें से एक खंभा ऐसा है जो ज़मीन को छूता ही नहीं। इस खंभे के नीचे से आराम से कपड़ा या कागज़ निकालना संभव है। इसे देखकर हर कोई दंग रह जाता है और यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि इतनी सटीकता और संतुलन कैसे संभव हुआ होगा, जब उस समय आधुनिक तकनीक और मशीनें उपलब्ध नहीं थीं। माना जाता है कि अंग्रेजों के समय एक इंजीनियर ने इस खंभे का रहस्य जानने की कोशिश की। जैसे ही उसने इसे हल्का सा भी हिलाया, पूरे मंदिर में कंपन महसूस होने लगा और उसे तुरंत रोकना पड़ा। यही घटना इस खंभे को और रहस्यमयी बना देती है। यह खंभा न केवल वास्तुकला की उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि प्राचीन भारतीय विज्ञान और गणित की भी झलक दिखाता है।

मंदिर का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। कहा जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ जटायु ने रावण से युद्ध किया था। जब जटायु घायल होकर गिरा, तब भगवान राम ने उसे उठाकर कहा – “ले पक्षी” यानी “उठो पक्षी।” यही शब्द समय के साथ इस स्थान के नाम लेपाक्षी में बदल गए। इस प्रकार यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पौराणिक कथाओं और महाकाव्यों से भी जुड़ा हुआ है।
मंदिर में बनी छत की चित्रकला भी बेहद अद्भुत है। यहाँ की पेंटिंग्स भारत की सबसे प्राचीन और सुंदर चित्रकलाओं में गिनी जाती हैं। इन चित्रों में प्राचीन जीवन, युद्ध, और धार्मिक कथाओं का चित्रण बड़ी निपुणता से किया गया है। साथ ही, मंदिर में स्थित विशाल नंदी प्रतिमा देश के सबसे बड़े नंदी में से एक है, जो अपने आकार और सटीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
अद्भुत वास्तुकला और विज्ञान का प्रतीक

लेपाक्षी मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय कला और विज्ञान का जीवंत प्रमाण है। हवा में टंगा खंभा इस बात का सबूत है कि प्राचीन वास्तुकारों और शिल्पकारों ने संतुलन, गुरुत्वाकर्षण और स्थापत्य विज्ञान को किस स्तर तक समझा था। आज भी वैज्ञानिक इस रहस्य को पूरी तरह सुलझा नहीं पाए हैं। कई लोगों का मानना है कि इस खंभे का निर्माण इस तरह किया गया कि उसकी पूरी संरचना शिल्प कौशल और प्राकृतिक संतुलन पर आधारित है। मंदिर की नक्काशी और पत्थर की कारीगरी अद्वितीय है। हर खंभे और पत्थर को इस तरह से तराशा गया है कि वह न केवल सुंदर दिखाई दे, बल्कि उसकी संरचना समय और प्रकृति की चुनौतियों का सामना कर सके। हवा में टंगे खंभे के रहस्य ने इस मंदिर को विश्वभर में अद्वितीय बना दिया है।
यदि कभी आंध्रप्रदेश जाने का मौका मिले, तो लेपाक्षी मंदिर जरूर देखें। यहाँ केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि चमत्कार और प्राचीन विज्ञान का अनुभव भी किया जा सकता है। हवा में टंगे खंभे की अद्भुत संतुलन कला देखकर कोई भी व्यक्ति हैरान रह जाता है और यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि हमारे पूर्वजों ने बिना किसी आधुनिक यंत्र के इतनी सटीकता और कला कैसे हासिल की। लेपाक्षी मंदिर हमें यह सिखाता है कि वास्तुकला, कला, विज्ञान और आस्था का संगम किस हद तक मनुष्य को चमत्कृत कर सकता है। यह मंदिर न केवल भारत की प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि उन अद्भुत रहस्यों का भी साक्षी है, जिन्हें आज भी विज्ञान पूरी तरह समझ नहीं पाया है।