खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पूजनीय हिन्दू मंदिर है, जो भगवान श्री गणेश को समर्पित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। इसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में मालवा की धर्मपरायण और न्यायप्रिय शासिका अहिल्याबाई होलकर द्वारा कराई गई थी। कहा जाता है कि उस समय मुगल शासक औरंगज़ेब के शासनकाल में अनेक हिन्दू मंदिरों को क्षति पहुँचाई जा रही थी। इसी भय से भगवान गणेश की इस प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए एक कुएँ में छिपा दिया गया था। बाद में जब परिस्थितियाँ अनुकूल हुईं, तब उस प्रतिमा को निकालकर वर्तमान स्थान पर विधिवत स्थापित किया गया।
विराजमान भगवान गणेश की चमत्कारी प्रतिमा

मंदिर की सबसे विशेष बात यहाँ विराजमान भगवान गणेश की चमत्कारी प्रतिमा है। भक्तों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। विशेष रूप से एक अनोखी परंपरा यहाँ प्रचलित है—यदि श्रद्धालु गणेश जी की प्रतिमा के पीछे उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं, तो उनकी इच्छा अवश्य पूरी होती है। यही कारण है कि प्रतिदिन हजारों भक्त इस अनुष्ठान के लिए मंदिर आते हैं। मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत आकर्षक है। गर्भगृह की बाहरी दीवारें तथा मुख्य द्वार चांदी से अलंकृत हैं, जो मंदिर की भव्यता को और बढ़ाते हैं। भगवान गणेश की मूर्ति की आँखें हीरों से जड़ी हुई हैं, जिन्हें इंदौर के एक श्रद्धालु व्यापारी ने भेंट किया था। मंदिर परिसर स्वच्छ, सुव्यवस्थित और शांत वातावरण से युक्त है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। यह मंदिर मध्य प्रदेश का पहला “फाइव स्टार रेटेड” धार्मिक स्थल भी माना जाता है, जिसे स्वच्छता, सुरक्षा और व्यवस्थापन के उत्कृष्ट स्तर के लिए सम्मानित किया गया है। यहाँ की व्यवस्थाएँ आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं, जिससे दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती।
भगवान गणेश को विशेष लड्डू का भोग अर्पित किया जाता
मंदिर में प्रतिवर्ष विनायक चतुर्थी का पर्व अत्यंत धूमधाम और भव्यता से मनाया जाता है। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन हेतु उमड़ पड़ते हैं। विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भगवान गणेश को विशेष रूप से लड्डू का भोग अर्पित किया जाता है। कई भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर अपने वजन के बराबर लड्डू अर्पित करते हैं, जो यहाँ की एक विशिष्ट परंपरा है।
मंदिर प्रातः 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है तथा सुबह और शाम की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। आरती के समय मंदिर का वातावरण भक्तिमय संगीत और जयघोष से गूंज उठता है, जो श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। इस प्रकार खजराना गणेश मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यह मंदिर इंदौर की पहचान बन चुका है और देश-विदेश से आने वाले भक्तों को श्रद्धा और भक्ति की अद्वितीय अनुभूति प्रदान करता है।