कालाष्टमी व्रत भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक भगवान काल भैरव और भगवान शिव की पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी का महत्व और पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन भक्त उपवास रखते हैं और विशेष रूप से रात्रि में काल भैरव की आराधना करते हैं। इस दिन मंदिरों में दीपदान, अभिषेक और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। काल भैरव को समय और मृत्यु का नियंत्रक माना जाता है, इसलिए इनकी उपासना से जीवन में साहस, सुरक्षा और आत्मबल की वृद्धि होती है। भक्त रात्रि जागरण कर भैरव मंत्रों का जाप करते हैं। मान्यता है कि इस साधना से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कालाष्टमी व्रत मंत्र
शिव पुराण में काल भैरव की पूजा के लिए निम्न मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है—
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!
अन्य मंत्र—
ॐ भयहरणं च भैरव:।
ॐ कालभैरवाय नम:।
ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।
ॐ भ्रं कालभैरवाय फट्।
इन मंत्रों का श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करने से भय, बाधाएँ और संकट दूर होते हैं तथा जीवन में शांति आती है।
भगवान काल भैरव की आरती
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौर देवी कृत सेवा।।
प्रभु जय भैरव देवा।।
तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
जय भैरव देवा…
वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी।।
जय भैरव देवा।।
तुम बिन देवा, सेवा सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन से सब दुःख खोवे ॥
जय भैरव देवा।।
तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी।
कृपा कीजिये भैरवजी, करिए नहीं देरी।।
जय भैरव देवा।।
पांव घुंघरू बाजत अरु डमरू दमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत।
जय भैरव देवा।।
कालभैरवजी की आरती जो कोई जन गावे।
कहे धरनी धर मानुष मनवांछित फल पावे।।
जय भैरव देवा।।
मई 2026 की कालाष्टमी
इस वर्ष मई महीने की कालाष्टमी 9 मई को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त उपवास, पूजा और रात्रि जागरण कर भगवान काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। यह दिन विशेष रूप से आध्यात्मिक उन्नति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।