ककनमठ मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित एक अत्यंत प्राचीन, रहस्यमय और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। यह मंदिर लगभग 11वीं शताब्दी में कछवाहा वंश के शासक कीर्तिराज (या कीर्तिराज कच्छपघात) द्वारा बनवाया गया माना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और आज भी अपनी अनोखी बनावट तथा रहस्यमयी कहानियों के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
ककनमठ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण शैली है। लगभग 115 फीट ऊँचा यह मंदिर बिना किसी गारे या सीमेंट के पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाया गया है। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो पत्थरों का ढेर संतुलन के सहारे खड़ा हो। यह आश्चर्य की बात है कि इतने वर्षों, आंधी-तूफानों और भूकंपों के बाद भी यह मंदिर आज तक मजबूती से खड़ा है। पुरातत्वविदों के अनुसार, मंदिर का निर्माण अत्यंत कुशल शिल्पियों द्वारा किया गया था, जिन्होंने पत्थरों को इस प्रकार काटकर जोड़ा कि वे बिना किसी जोड़ सामग्री के भी स्थिर रह सकें।
मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके गर्भगृह, मंडप और शिखर में सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है। हालांकि समय के साथ मंदिर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है, फिर भी इसकी भव्यता आज भी स्पष्ट दिखाई देती है। मंदिर परिसर में बिखरे हुए विशाल पत्थर इस बात का प्रमाण हैं कि कभी यह संरचना और भी अधिक विस्तृत रही होगी।
भूत- प्रतों ने किया था एक रात में ही मंदिर का निर्माण
ककनमठ मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी और लोककथाएं भी प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण मनुष्यों ने नहीं, बल्कि भूत-प्रेतों ने एक ही रात में किया था। जैसे ही सुबह की पहली किरण पड़ी, वे शक्तियां अदृश्य हो गईं और निर्माण कार्य अधूरा रह गया। इसी कारण मंदिर का कुछ भाग अधूरा और असंतुलित प्रतीत होता है।
रात होते ही मंदिर परिसर में सुनाई देती हैं, रहस्यमयी आवाजें
कुछ ग्रामीणों का यह भी विश्वास है कि रात के समय मंदिर परिसर में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं और वहाँ भूतों का बसेरा है। सूर्यास्त के बाद लोग वहाँ जाने से बचते हैं। हालांकि इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी इन कहानियों ने मंदिर के रहस्य को और गहरा कर दिया है। इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ इन कथाओं को लोकविश्वास मानते हैं और मंदिर की संरचना को प्राचीन भारतीय स्थापत्य कौशल का परिणाम बताते हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इस मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। आज यह स्थान इतिहास प्रेमियों, पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। ककनमठ मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे प्राचीन वास्तुशिल्प ज्ञान, तकनीकी दक्षता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी है।
इस प्रकार ककनमठ मंदिर अपने इतिहास, अद्भुत निर्माण शैली और भूतों से जुड़ी रहस्यमयी कथाओं के कारण आज भी लोगों के मन में जिज्ञासा और आश्चर्य उत्पन्न करता है। यह मंदिर हमें यह सोचने पर विवश करता है कि हमारे पूर्वजों की कला और विज्ञान कितने उन्नत रहे होंगे, जिनकी झलक आज भी इस भव्य संरचना में दिखाई देती है।