महाशिवरात्रि साल में एक बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। यह पर्व साल में 12 बार आता है और हर बार भक्तों के लिए भगवान शिव की कृपा पाने का पावन अवसर लेकर आता है। इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को दूर कर देती है और मन को शांति प्रदान करती है।
धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर व्रत और पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह दिन आत्मशुद्धि, साधना और भक्ति का विशेष समय माना जाता है, जब शिव आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मासिक शिवरात्रि कब है?
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगी।
मासिक शिवरात्रि में निशिता काल (मध्य रात्रि पूजा समय) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस बार मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा।
मासिक शिवरात्रि पूजा मुहूर्त
इस दिन निशिता काल की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि पर निशिता पूजा का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इस समय की गई शिव आराधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है और इसका प्रभाव जीवन पर गहरा पड़ता है।
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
इस दिन भक्त प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और शिवालय या घर के मंदिर में भगवान शिव की पूजा करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित किए जाते हैं।
भगवान शिव को भांग, फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। रात के निशिता काल में पुनः शिवलिंग का अभिषेक कर आरती की जाती है।
मासिक शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर व्रत रखने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत सुख-समृद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति प्रदान करता है। साथ ही अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।