Friday, 2 Oct 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > जितिया व्रत की चिल्हो-सियारो कथा, जानिए पूरी कहानी
व्रत और त्योहार

जितिया व्रत की चिल्हो-सियारो कथा, जानिए पूरी कहानी

दिव्यसुधा
Last updated: October 2, 2026 12:37 pm
दिव्यसुधा
Share
जितिया व्रत की चिल्हो-सियारो कथा
जितिया व्रत में चिल्हो-सियारो की कथा सुनने की परंपरा है।
SHARE

जितिया व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत और जिउतिया के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं और संतान के उज्ज्वल भविष्य व मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। जितिया व्रत के दौरान चिल्हो-सियारो की कथा सुनने और पढ़ने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इस कथा में व्रत की श्रद्धा, संकल्प और नियमों के पालन का महत्व बताया गया है।

चील और सियारिन में थी गहरी दोस्ती

लोकप्रिय लोककथा के अनुसार, एक घने जंगल में सेमर के पेड़ पर एक चील रहती थी। उसी के आसपास एक झाड़ी में सियारिन का घर था। दोनों के बीच बहुत गहरी दोस्ती थी। चील जब भी भोजन करती, अपनी सहेली सियारिन के लिए भी कुछ हिस्सा बचाकर रखती थी। दोनों एक-दूसरे का साथ देती थीं और इसी तरह अपना जीवन खुशी से व्यतीत कर रही थीं।

एक दिन दोनों ने देखा कि गांव की महिलाएं जितिया व्रत की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं से इस व्रत के बारे में जाना। संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को जानकर चील और सियारिन ने भी इसे रखने का फैसला किया।

सियारिन से नहीं निभा व्रत

चील ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निर्जला व्रत शुरू किया। उसने पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन किया। लेकिन रात होते-होते सियारिन को तेज भूख लगने लगी। वह अपनी भूख पर नियंत्रण नहीं रख सकी और उसने मांस तथा हड्डियां खा लीं।

चील ने जब कुछ आवाज सुनी तो सियारिन से इसका कारण पूछा। सियारिन ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय बात छिपाने की कोशिश की। चील को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। उसने सियारिन को समझाया कि जब किसी व्रत का संकल्प लिया जाए, तो उसे पूरी श्रद्धा और नियम के साथ निभाना चाहिए।

अगले जन्म में बहनें बनीं

कथा के अनुसार, अगले जन्म में दोनों ने मनुष्य के रूप में जन्म लिया और बहनें बनीं। बड़ी बहन सियारिन के पूर्व जन्म से जुड़ी मानी गई, जबकि छोटी बहन चील के रूप से जुड़ी मानी गई। समय बीतने पर बड़ी बहन की संतान बार-बार जीवित नहीं रहती थी, जबकि छोटी बहन के बच्चे स्वस्थ और दीर्घायु होते थे। यह देखकर बड़ी बहन के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गई। वह छोटी बहन के बच्चों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करने लगी।

हालांकि कथा के अनुसार, छोटी बहन की संतान को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ। धीरे-धीरे बड़ी बहन को अपनी पुरानी भूल का एहसास होने लगा। उसे समझ आया कि पिछले जन्म में व्रत के नियमों का पालन न करने और संकल्प को पूरा न करने का परिणाम उसे भुगतना पड़ा।

पश्चाताप के बाद किया जितिया व्रत

अपनी भूल पर पछताने के बाद बड़ी बहन ने श्रद्धा और विधि-विधान के साथ जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत करने का संकल्प लिया। उसने व्रत के नियमों का पालन किया और पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना की। कथा के अनुसार, इसके बाद उसकी संतान भी सुरक्षित रहने लगी।

इसी वजह से जितिया व्रत के दौरान चिल्हो-सियारो की कथा सुनने और पढ़ने की परंपरा है। यह कथा व्रत के प्रति आस्था, संकल्प और नियमों का पालन करने की महत्ता को दर्शाती है। साथ ही, यह मां के अपनी संतान के प्रति प्रेम, ममता और उनके सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना को भी अभिव्यक्त करती है।

जितिया व्रत से जुड़ी यह कथा आज भी कई क्षेत्रों में श्रद्धा के साथ सुनी जाती है। अलग-अलग स्थानों पर कथा के वर्णन और लोकपरंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है, लेकिन संतान की मंगलकामना और व्रत के प्रति श्रद्धा इसकी मुख्य भावना मानी जाती है।

TAGGED:Chilho Siyaro KathaHindu VratJitiya KathaJitiya VratJitiya Vrat KathaJivitputrika KathaJivitputrika VratSanatan DharmaVrat Katha
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 2 अक्टूबर 2026 का दैनिक राशिफल और 12 राशियों का भविष्यफल 2 अक्टूबर 2026 राशिफल: आज किस राशि पर होगी धन की कृपा?
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

24 फरवरी 2026 से प्रारंभ हो रहे होलाष्टक के दौरान किन राशियों को सावधानी बरतनी चाहिए, जानें ज्योतिषीय प्रभाव और उपाय।
व्रत और त्योहार

24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ: इन राशियों के लिए रहेगा चुनौतीपूर्ण समय

By दिव्यसुधा
योगिनी एकादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और पारण समय
व्रत और त्योहार

योगिनी एकादशी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पारण का समय, व्रत कथा और धार्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
गुप्त नवरात्रि 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
व्रत और त्योहार

गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, योग और दस महाविद्याओं की साधना

By दिव्यसुधा
हरियाली तीज 2026 पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती महिलाएं
व्रत और त्योहार

हरियाली तीज 2026: 6 शुभ योग, पूजा मुहूर्त और महत्व

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?