हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का अत्यंत धार्मिक और पवित्र महत्व बताया गया है। यह तिथि कार्तिक मास के अंत का संकेत देती है और इसे वर्ष का सबसे पुण्यकारी दिन माना जाता है। इस दिन किया गया दान, स्नान और पूजा अत्यंत फलदायी होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, और इस विजय की खुशी में देवताओं ने दीप जलाकर दिवाली मनाई थी। इसलिए इस दिन और इसके अगले दिन किए गए दान-पुण्य से घर में सुख-समृद्धि और देवी-देवताओं का वास होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर दान का महत्व
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर सभी देवता पृथ्वी पर आते हैं। ऐसे में इस दिन किया गया प्रत्येक दान देवी-देवताओं को प्रसन्न करता है। विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कार्तिक पूर्णिमा या उसके अगले दिन दान करना शुभ माना गया है। इस दिन किए गए दान से घर में दरिद्रता दूर होती है, धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करें
अन्न का दान करें – इस दिन चावल, गेहूं, आटा जैसे अन्न का दान करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि अन्नदान करने से घर में कभी भोजन या धन की कमी नहीं होती।
वस्त्रों का दान करें – पूर्णिमा या अगले दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को वस्त्र दान करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दीप दान का महत्व – इस दिन पांच दीपक जलाना अत्यंत शुभ होता है। देवताओं के नाम से पांच दीपक जलाने से अंधकार और नकारात्मकता दूर होती है।
तिल, गुड़ और घी का दान करें – यह दान सेहत और सौभाग्य को बढ़ाता है। तिल और गुड़ से शारीरिक बल और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
हरी वस्तुओं का दान करें – मूंग दाल, हरी सब्जियां या हरे वस्त्र का दान करने से जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है।
कार्तिक पूर्णिमा और इसके अगले दिन किया गया दान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन हमें दया, करुणा और सेवा का संदेश देता है। जब हम दूसरों की सहायता करते हैं, तब ईश्वर हमारे घर में स्थायी सुख और लक्ष्मी का वास करते हैं।