क्या आपने कभी गौर किया है कि हर शिव मंदिर में नवग्रह मंदिर होता है, लेकिन भगवान विष्णु, श्रीराम या श्रीकृष्ण के मंदिरों में नवग्रह नहीं दिखते? आखिर ऐसा क्यों? सनातन परंपरा के अनुसार शिव जी को महाकाल और सभी नवग्रहों का अधिपति माना गया है। मान्यता है कि सूर्य, शनि, मंगल, राहु-केतु सहित सभी ग्रह शिव की आज्ञा से अपना कार्य करते हैं। इसलिए शिव जी मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना की जाती है। वहीं वैष्णव परंपरा में अनन्य भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। विश्वास है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु, श्रीराम या श्रीकृष्ण की शरण में रहता है, उसके लिए ग्रहों का प्रभाव भी प्रभु की इच्छा के अनुसार ही होता है। इसी कारण वैष्णव मंदिरों में नवग्रह मंदिर नहीं बनाए जाते।
सनातन धर्म में भगवान हनुमान को संकटमोचन, अष्टसिद्धि-नवनिधि के दाता और अटूट भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। हर मंगलवार और शनिवार को लाखों श्रद्धालु हनुमान मंदिरों में जाकर उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान हनुमान को विशेष रूप से चमेली का तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है? इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता और पारंपरिक आस्था जुड़ी हुई है।
सिंदूर और हनुमान जी की कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान हनुमान ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा। जब उन्होंने इसका कारण पूछा, तब माता सीता ने बताया कि यह भगवान श्रीराम की लंबी आयु और मंगल के लिए लगाया जाता है। श्रीराम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति से भाव-विभोर होकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। उनकी इस निस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उन्हें आशीर्वाद दिया। तभी से हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई।
चमेली का तेल क्यों चढ़ाया जाता है?
धार्मिक परंपराओं में चमेली के तेल को पवित्रता, सुगंध और श्रद्धा का प्रतीक माना गया है। हनुमान जी की प्रतिमा पर सिंदूर चढ़ाते समय उसमें चमेली का तेल मिलाने से सिंदूर अच्छी तरह चढ़ता है। यही कारण है कि कई मंदिरों में सिंदूर के साथ चमेली का तेल अर्पित करने की परंपरा आज भी निभाई जाती है। इसे भक्त की भक्ति और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।
मंगलवार और शनिवार का महत्व
मंगलवार और शनिवार भगवान हनुमान की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं। इन दिनों श्रद्धालु हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से भगवान हनुमान भक्तों के कष्ट दूर करते हैं तथा साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान
हनुमान जी की पूजा हमेशा शुद्ध मन, श्रद्धा और नियमपूर्वक करनी चाहिए। मंदिर की परंपरा या अपने कुलाचार के अनुसार ही पूजा सामग्री अर्पित करें। यदि आप किसी विशेष अनुष्ठान, हवन या साधना का संकल्प ले रहे हैं, तो किसी योग्य आचार्य या विद्वान पुजारी के मार्गदर्शन में पूजा करना अधिक उचित माना जाता है।