जयपुर के जगतपुरा में आकार ले रहा गुप्त वृंदावन धाम राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रहा है। करीब छह एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा यह 17 मंजिला भव्य परिसर आने वाले समय में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है।
हरे कृष्ण मूवमेंट जयपुर द्वारा निर्मित इस धाम में भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ मां लक्ष्मी के भी दिव्य दर्शन प्राप्त होंगे। यह परिसर केवल पूजा और दर्शन का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि यहां आने वाले लोगों को कृष्ण भक्ति, वैदिक ज्ञान और सनातन संस्कृति को आधुनिक माध्यमों के साथ अनुभव करने का अवसर भी मिलेगा।
धाम की वास्तुकला और सुविधाएं इसे विशेष बनाने वाली हैं। परिसर में 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी कमान छतरी तैयार की जा रही है। रात के समय प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से इस पर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का मनोहारी प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं 70 फीट ऊंचा मुख्य द्वार राजस्थानी शिल्पकला की भव्यता को दर्शाएगा और इसे 108 मोरों से सजाया जाएगा।
परिसर में करीब 25 हजार वर्ग फीट का विशाल दर्शन हॉल, 14 प्रेजेंटेशन रूम, ऑडियो-विजुअल थिएटर और वैदिक म्यूजियम भी विकसित किए जाएंगे। इन सुविधाओं के माध्यम से श्रद्धालु भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को एक नए और रोचक तरीके से समझ सकेंगे।
गुप्त वृंदावन धाम को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है। परिसर में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस तरह यहां आध्यात्मिक वातावरण के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी देखने को मिलेगा।
आध्यात्म, राजस्थानी स्थापत्य और आधुनिक तकनीक का यह अनूठा संगम जयपुर के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दे सकता है। 12 मई 2027, अक्षय तृतीया के अवसर पर इसके उद्घाटन का प्रस्ताव है। इसके बाद यह धाम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जयपुर के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।
गुप्त वृंदावन धाम केवल एक निर्माणाधीन परिसर नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति, ज्ञान और भारतीय परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक प्रयास है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर कृष्ण भक्ति, वैदिक ज्ञान और सनातन संस्कृति की अनुभूति मिलेगी।