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दिव्य सुधा > अन्य > गीता रसामृतम लखनऊ : इस्कॉन द्वारा भव्य गीता ज्ञान महोत्सव
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गीता रसामृतम लखनऊ : इस्कॉन द्वारा भव्य गीता ज्ञान महोत्सव

दिव्यसुधा
Last updated: January 17, 2026 7:06 pm
दिव्यसुधा
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लखनऊ में आयोजित गीता रसामृतम महोत्सव में हरिनाम संकीर्तन और गीता ज्ञान प्रवचन करते इस्कॉन संत
लखनऊ में इस्कॉन द्वारा आयोजित “गीता रसामृतम” महोत्सव में गीता ज्ञान, हरिनाम संकीर्तन और भक्ति संगीत का दिव्य संगम
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श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन), सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ द्वारा दो दिवसीय दिव्य एवं भव्य गीता ज्ञान महोत्सव “गीता रसामृतम” का आयोजन विंट क्लब, शहीद पथ, लखनऊ में किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य भगवद् गीता के अमृत रस को आम जन-जन तक पहुँचाना और जीवन में आध्यात्मिक जागरण का संदेश देना था।

शुभारंभ और दिव्य वातावरण
कार्यक्रम के प्रथम दिवस 17 जनवरी 2026 को इस आयोजन का शुभारंभ इस्कॉन लखनऊ के मंदिर अध्यक्ष श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभुजी तथा उत्तर प्रदेश के यशस्वी उप मुख्यमंत्री श्रीमान बृजेश पाठक जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही महोत्सव का वातावरण पवित्र और दिव्य बन गया, जिसने उपस्थित भक्तों के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।

हरिनाम संकीर्तन और भक्ति संगीत
महोत्सव में दिव्य हरिनाम संकीर्तन और मुकुंदा रॉक बैंड की शानदार आध्यात्मिक प्रस्तुति ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्त झूमते हुए भक्ति के सागर में डूब गए और हर गीत, हर कीर्तन में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण की अनुभूति हुई।

गीता का संदेश: आत्मा ही असली पहचान
इस्कॉन मंदिर अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने “गीता रसामृतम” सत्संग में बताया कि अधिकतर लोग संसार में अपनी पहचान नाम, ख्याति और शरीर से जोड़ते हैं, जबकि वास्तविक सत्य यह है कि हम भगवान के अंश हैं। हम जीवात्मा हैं और जिस सुख की तलाश करते हैं, वह केवल शरीर से मिलने वाला क्षणिक सुख है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थायी सुख वही है जो निरंतर बढ़ता जाए, जिसे हम आनंद कहते हैं। आनंद की प्राप्ति के लिए आध्यात्मिक जीवन को गंभीरता से अपनाना आवश्यक है। आध्यात्मिक आनंद का स्रोत अध्यात्मिक ज्ञान है। बिना ज्ञान के कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक जीवन को सही रूप से अपना नहीं सकता।

ज्ञान का क्रमबद्ध अध्ययन: सफलता की कुंजी
श्रीमान प्रभु जी ने कहा कि ज्ञान तभी फलदायी होता है जब उसे क्रमबद्ध तरीके से ग्रहण किया जाए। यदि ज्ञान को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वह हमारे हृदय में उतर नहीं पाता और जीवन में परिवर्तन नहीं ला पाता। इसी विचारधारा के साथ इस्कॉन ने दो दिवसीय गीता ज्ञान महोत्सव का आयोजन किया, जिसके बाद 64 दिनों की भक्ति वृक्ष कक्षाओं की श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी। इन कक्षाओं के माध्यम से भक्तों को क्रमबद्ध रूप से आध्यात्मिक शिक्षा दी जाएगी।

भक्ति, कीर्तन और प्रसाद का आनंद
गीता ज्ञान महोत्सव में लखनऊ एवं आसपास के जनपदों से आए गणमान्य भक्त उपस्थित रहे। सभी भक्तों ने श्रीकृष्ण भगवान के भजन, कीर्तन, नृत्य और दिव्य भोजन प्रसाद का आनंद उठाया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। “गीता रसामृतम” ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि जब गीता का ज्ञान सही रूप से ग्रहण किया जाए, तो जीवन स्वयं एक आध्यात्मिक यात्रा बन जाता है।

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