सावन माह में आने वाली गजानन संकष्टी चतुर्थी भगवान श्रीगणेश की उपासना के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानी जाती है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, लेकिन सावन मास में इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि सावन भगवान शिव का प्रिय महीना है और श्रीगणेश उनके प्रिय पुत्र हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन, व्रत तथा रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन के सभी विघ्न, संकट और बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही बुद्धि, सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष गजानन संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त को रात 11 बजकर 8 मिनट से प्रारंभ होगी और 2 अगस्त को रात 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और चंद्रोदय के नियमों को ध्यान में रखते हुए गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा। इसी दिन श्रद्धालु भगवान श्रीगणेश का पूजन करेंगे और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करेंगे।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:18 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक शुभ रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह 7:25 बजे से दोपहर 12:26 बजे के बीच किसी भी शुभ समय में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
गजानन संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान श्रीगणेश भक्तों के जीवन से सभी प्रकार के विघ्न, संकट और कष्टों का निवारण करते हैं। सावन मास में आने वाली यह संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर मानी जाती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, गणेश मंत्रों का जप करने, दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करने से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि, बुद्धि-विवेक और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।