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दिव्य सुधा > अन्य > देवियों की वेशभूषा के रंगों का आध्यात्मिक रहस्य
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देवियों की वेशभूषा के रंगों का आध्यात्मिक रहस्य

Ekta Mishra
Last updated: February 26, 2026 12:34 pm
Ekta Mishra
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मां सरस्वती, मां दुर्गा और मां लक्ष्मी के वस्त्रों के रंगों का आध्यात्मिक महत्व दर्शाता चित्र
देवियों के वस्त्रों के रंगों में छिपा है दिव्य ऊर्जा और शक्ति का रहस्य
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सनातन परंपरा में रंग केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि ऊर्जा, गुण और ग्रहों से जुड़ी सूक्ष्म शक्तियों के प्रतीक माने गए हैं। प्रत्येक देवी-देवता की वेशभूषा का रंग उनके स्वरूप, स्वभाव और दिव्य कार्यों को दर्शाता है। यही कारण है कि विद्या की अधिष्ठात्री मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जबकि मां दुर्गा और मां लक्ष्मी प्रायः लाल या पीताम्बर वस्त्रों में विराजमान दिखाई देती हैं।

मां सरस्वती और श्वेत रंग का रहस्य
मां सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, वाणी और कला की देवी हैं। उनका श्वेत वस्त्र पूर्ण पवित्रता, सात्विकता और निर्मलता का प्रतीक है। श्वेत रंग में सभी रंग समाहित होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे सच्चा ज्ञान समस्त अज्ञान को दूर कर व्यक्ति के भीतर प्रकाश उत्पन्न करता है। जब साधक के भीतर प्रज्ञा और विवेक का उदय होता है, तो उसका मन स्वच्छ और शांत हो जाता है। श्वेत वस्त्र उसी निर्मल चेतना का प्रतीक है।

जो व्यक्ति सात्विक जीवन, शुद्ध बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करता है, उसके लिए श्वेत रंग अत्यंत शुभ माना गया है। मां सरस्वती संगीत, नृत्य, गायन और अभिनय की भी अधिष्ठात्री हैं, इसलिए उनके श्वेत स्वरूप में सृजन की पवित्र ऊर्जा झलकती है।

मां दुर्गा, लक्ष्मी और लाल रंग का महत्व
लाल रंग शक्ति, साहस, पराक्रम और ऊर्जा का प्रतीक है। मां दुर्गा, जो असुरों का संहार करती हैं, लाल वस्त्र धारण कर अपनी रणशक्ति और तेजस्विता को दर्शाती हैं। भारतीय संस्कृति में लाल रंग शुभता और मंगल का भी प्रतीक है। विवाह, पूजन, सिंदूर और मांगलिक अवसरों में लाल रंग का प्रयोग इसी कारण से किया जाता है।

मां लक्ष्मी भी लाल वस्त्र धारण करती हैं, क्योंकि लाल रंग सक्रियता और समृद्धि का संकेत देता है। यह रंग जीवन में ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। धर्मग्रंथों के अनुसार मां दुर्गा को लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल का फूल अति प्रिय है। इससे देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

भगवा और अन्य रंगों का आध्यात्मिक महत्व
ऋषि-मुनि और संत-महात्मा भगवा वस्त्र धारण करते हैं। भगवा रंग त्याग, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक है। यह अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जो अहंकार और अज्ञान को जलाकर आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है।

ग्रहों और रंगों का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में भी रंगों का विशेष महत्व है। ग्रहों की शांति के लिए उनके अनुरूप रंगों का दान या धारण करना लाभकारी माना जाता है। जैसेबुध ग्रह के लिए हरा, बृहस्पति के लिए पीला, शनि के लिए नीला या काला रंग शुभ माना गया है।

इस प्रकार, रंग केवल बाहरी आभूषण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का सूक्ष्म माध्यम हैं। उचित रंगों का चयन साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मनोवांछित फल प्रदान कर सकता है।

TAGGED:आध्यात्मिक ज्ञानज्योतिष शास्त्रदेवी महिमाधार्मिक रहस्यमां दुर्गामां लक्ष्मीमां सरस्वतीरंगों का महत्ववैदिक परंपरासनातन धर्म
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