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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
व्रत और त्योहार

दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Ekta Mishra
Last updated: March 12, 2026 3:43 pm
Ekta Mishra
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पीपल के पेड़ की पूजा करती महिलाएं – दशा माता व्रत 2026
दशा माता व्रत के दिन महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
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सनातन धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। कई ऐसे व्रत बताए गए हैं जिन्हें करने से व्यक्ति के जीवन की परेशानियां कम होती हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं। इन्हीं में एक महत्वपूर्ण व्रत दशा माता व्रत भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत व्यक्ति की खराब दशा को सुधारने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियम के साथ दशा माता की पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं और आर्थिक तंगी से भी राहत मिलती है।

हिंदू परंपरा में ऐसे कई व्रत और पर्व हैं जो जीवन में आ रही समस्याओं को दूर करने और सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए किए जाते हैं। दशा माता का व्रत भी उन्हीं में से एक माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से व्यक्ति के जीवन की कठिन परिस्थितियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो आर्थिक तंगी, ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति या लगातार आने वाली बाधाओं से परेशान रहते हैं।

कब रखा जाएगा दशा माता व्रत 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में दशमी तिथि 13 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ होगी और 14 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। तिथि के आधार पर इस वर्ष दशा माता का व्रत 13 मार्च 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखकर माता की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

कैसे की जाती है दशा माता की पूजा?
दशा माता व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान या किसी पवित्र स्थल पर माता की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान धूप, दीप, फल, फूल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर महिलाएं दशा माता की कथा सुनती या पढ़ती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजा के बाद भगवान से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

क्यों खास माना जाता है यह व्रत?
दशा माता का व्रत भले ही बहुत अधिक प्रसिद्ध न हो, लेकिन इसकी धार्मिक मान्यता काफी गहरी मानी जाती है। लोक विश्वास है कि इस व्रत को नियमित रूप से करने से व्यक्ति के जीवन की कठिन परिस्थितियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। साथ ही मन में शांति और सकारात्मकता भी बढ़ती है।

क्या है दशा माता व्रत का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता व्रत व्यक्ति के जीवन की नकारात्मक परिस्थितियों को दूर करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति का भाग्य साथ नहीं दे रहा हो या ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो, तब यह व्रत विशेष लाभकारी माना जाता है। इसी कारण इसे भाग्य सुधारने वाला व्रत भी कहा जाता है। श्रद्धा और आस्था के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है।

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