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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > बुध प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा पाने का विशेष अवसर, जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि
व्रत और त्योहार

बुध प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा पाने का विशेष अवसर, जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

दिव्यसुधा
Last updated: April 15, 2026 12:29 pm
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बुध प्रदोष व्रत 2026 में भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और प्रदोष काल का दृश्य
बुध प्रदोष व्रत 2026: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और भगवान शिव की पूजा विधि
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हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जो हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और मान्यता है कि इसे श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में वैशाख मास का कृष्ण पक्ष प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस बार इस व्रत की खास बात यह है कि इसी दिन वैशाख मासिक शिवरात्रि का भी संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण त्रयोदशी तिथि का आरंभ 14 अप्रैल 2026 को रात 12 बजकर 13 मिनट पर होगा और इसका समापन 15 अप्रैल 2026 को रात 11 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा। इस दिन दो महत्वपूर्ण व्रतों प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का संगम होने के कारण भक्तों को दोहरा फल प्राप्त होने की मान्यता है। ऐसे में इस दिन भगवान शिव की उपासना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

प्रदोष काल का महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। यह समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक का होता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 15 अप्रैल 2026 को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 1 मिनट से 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस समय में शिवजी की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि
इस व्रत को विधि-विधान से करने के लिए प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संकल्प के समय “अद्य अहं महादेवस्य कृपाप्राप्त्यै बुधप्रदोषव्रतं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को पुनः स्नान करें और प्रदोष काल में शिवजी की पूजा आरंभ करें।

यदि संभव हो तो किसी शिव मंदिर में जाकर पूजा करें। सबसे पहले भगवान शिव का जल, दूध, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद चंदन, अक्षत, धूप, दीप और फूल अर्पित करें। शिवजी को बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत आवश्यक माना गया है, क्योंकि यह उन्हें विशेष प्रिय है। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

इस दिन केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की पूजा भी करनी चाहिए। उन्हें लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री और सुहाग का सामान अर्पित करें। अंत में शिव-पार्वती की आरती कर पूजा को पूर्ण करें। श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

बुध प्रदोष व्रत 2026 एक अत्यंत शुभ अवसर है, जब भक्त एक ही दिन में दो व्रतों का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन की गई सच्ची भक्ति और पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी दुख दूर हो सकते हैं। इसलिए इस पावन अवसर का लाभ उठाकर शिव आराधना अवश्य करें।

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