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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > भाई दूज 2025: प्रेम, सुरक्षा और आशीर्वाद का पावन पर्व
व्रत और त्योहार

भाई दूज 2025: प्रेम, सुरक्षा और आशीर्वाद का पावन पर्व

दिव्यसुधा
Last updated: October 16, 2025 3:12 pm
दिव्यसुधा
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भाई दूज 2025 पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा – बहन द्वारा भाई को तिलक करते हुए
भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर आरती उतारती हैं और उनके दीर्घायु होने की कामना करती हैं।
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दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन भाई दूज के नाम से मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती हैं, उसी तरह भाई दूज के दिन भी बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाकर उनके सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। यह दिन न केवल पारिवारिक रिश्तों की मधुरता को बढ़ाता है, बल्कि इसमें गहरा आध्यात्मिक संदेश भी निहित है।

भाई दूज 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाई दूज 2025 की द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर, बुधवार रात 08 बजकर 16 मिनट पर होगी और इसका समापन 23 अक्टूबर, गुरुवार रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा।
उदय तिथि के अनुसार पर्व 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।
इस दिन तिलक का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक रहेगा।

भाई दूज पूजा विधि

  • भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई के लिए शुभ सामग्री से सजी पूजा की थाली तैयार करती हैं। इसमें दीपक, रोली, अक्षत, हल्दी, सुपारी, मिठाई, सूखा नारियल और मौली धागा रखा जाता है।
  • सबसे पहले घर में पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु और यमराज का ध्यान करते हुए दीप जलाएं।
  • भाई को उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बैठाएं।
  • बहन अपने भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करें।
  • फिर आरती उतारकर उन्हें मिठाई खिलाएं और दीर्घायु की कामना करें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं और आजीवन रक्षा का वचन देते हैं।
  • यह पारंपरिक अनुष्ठान भाई-बहन के बीच स्नेह, सुरक्षा और विश्वास की डोर को और मजबूत करता है।

भाई दूज का पौराणिक महत्व

भाई दूज की कथा यमराज और उनकी बहन देवी यमुना से जुड़ी है। कथानुसार, कार्तिक मास की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर गए। यमुना ने अत्यंत प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया, तिलक किया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। अपने बहन के स्नेह और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से इस दिन को ‘यम द्वितीया’ या ‘भाई दूज’ के नाम से मनाया जाने लगा।

धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता

भाई दूज केवल एक पारिवारिक पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन में प्रेम, विश्वास और करुणा का संदेश देता है। बहनें इस दिन भाई की रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहन के स्नेह और आदर का प्रतीक बनते हैं।
कहा जाता है कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाता है, उसके जीवन से सभी बाधाएं दूर होती हैं और यमराज भी उसकी रक्षा करते हैं।

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