मध्य प्रदेश की सतना-पन्ना रोड पर पतेरी मोड़ से गुजरते ही एक ऐसा स्थल आता है, जहां अनायास ही श्रद्धा से सिर झुक जाता है। यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि विश्वास, भक्ति और सामुदायिक एकजुटता का जीवंत प्रतीक है। पतेरी मोड़ स्थित बजरंग धाम आज सतना क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन भक्ति की गूंज सुनाई देती है।
करीब 25 वर्ष पूर्व यहां बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उस समय यह क्षेत्र अपेक्षाकृत शांत और कम आबादी वाला था, लेकिन समय के साथ आसपास विकास हुआ और लोगों की आवाजाही बढ़ी। जैसे-जैसे क्षेत्र का विस्तार हुआ, वैसे-वैसे मंदिर की महिमा और ख्याति भी फैलती चली गई। आज स्थिति यह है कि सतना-पन्ना रोड से गुजरने वाला शायद ही कोई श्रद्धालु ऐसा हो, जो यहां रुककर दर्शन न करता हो।
15 वर्षों से हो रहा भजन कीर्तन
मंदिर की सबसे विशेष बात इसकी सतत भक्ति परंपरा है। पिछले लगभग 15 वर्षों से यहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन हो रहा है। प्रतिदिन दो समय आरती और हर शाम सामूहिक कीर्तन का आयोजन निश्चित रूप से किया जाता है। दिनभर श्रद्धालु भगवान राम और बजरंगबली के दर्शन के लिए आते रहते हैं, जबकि शाम होते ही पूरा परिसर भक्ति रस में डूब जाता है। वृद्धजन हों या युवा, सभी सामूहिक कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।
मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ देखने को मिलती है। इन दिनों सुंदरकांड पाठ और विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाता है। होली के अवसर पर यहां बघेलखंड का प्रसिद्ध फगुआ बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जिसमें आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त समय-समय पर रामकथा और भंडारे का आयोजन जनसहयोग से किया जाता है।
मन्नतों का धाम
मंदिर की एक और अनूठी परंपरा है मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु स्वयं आकर अपनी श्रद्धानुसार योगदान देते हैं। कोई भंडारा कराता है, तो कोई कीर्तन या अन्य धार्मिक आयोजन करवाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। यही कारण है कि हर वर्ग, हर आयु और हर पृष्ठभूमि के लोग यहां खिंचे चले आते हैं।
बजरंग धाम आज केवल पूजा-स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। यहां भक्ति केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव है जहां आस्था के साथ सामूहिकता भी फलती-फूलती है।