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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > बड़ा मंगल 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय
व्रत और त्योहार

बड़ा मंगल 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, महत्व और उपाय

दिव्यसुधा
Last updated: May 5, 2026 12:07 pm
दिव्यसुधा
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ज्येष्ठ माह के बड़ा मंगल पर भगवान हनुमान की पूजा करते श्रद्धालु, मंदिर में चोला और प्रसाद अर्पित करते हुए
बड़ा मंगल 2026: हनुमान भक्ति और सेवा का पावन दिन
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ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी के बीच श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम लेकर आता है बड़ा मंगल। उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान हनुमान को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में पहला बड़ा मंगल 5 मई से प्रारंभ हो रहा है, जिसे “बुढ़वा मंगल” के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखकर संकटमोचन हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी काल में भगवान राम और हनुमानजी का प्रथम मिलन हुआ था। यही कारण है कि इस माह के मंगलवार को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन की गई पूजा कई गुना अधिक फल प्रदान करती है और जीवन में सुख-शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

बुढ़वा मंगल का धार्मिक महत्व
बुढ़वा मंगल केवल एक व्रत या पर्व नहीं, बल्कि सेवा, दान और समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से शनि दोष, मंगल दोष और अन्य ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से राहत मिलती है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में शनि या मंगल की अशुभ स्थिति होती है, उनके लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

इस दिन मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। जगह-जगह भंडारे, शरबत वितरण और प्रसाद सेवा का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी संदेश देती है, जहां जरूरतमंदों की सहायता कर पुण्य अर्जित किया जाता है।

बुढ़वा मंगल पूजा विधि
इस पावन दिन की शुरुआत प्रातःकाल स्नान से होती है। इसके बाद भक्त हनुमान मंदिर जाकर भगवान का दर्शन करते हैं और हनुमान चालीसा तथा सुंदरकांड का पाठ करते हैं। भगवान हनुमान को लाल चोला, सिंदूर और चमेली के तेल से श्रृंगार किया जाता है। उन्हें बूंदी के लड्डू, गुड़ और चने का भोग अर्पित किया जाता है।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर फलाहार करते हैं और शाम को आरती के पश्चात प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है और भक्तों के जीवन से संकट दूर होते हैं।

पहला बड़ा मंगल 2026: शुभ मुहूर्त और योग
5 मई 2026 को पहले बड़ा मंगल पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। इस दिन शिव योग और सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इसके साथ ही शुक्र के स्वराशि में होने से मालव्य राजयोग और सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य योग भी बन रहा है।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:12 से 4:55 तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। अभिजित मुहूर्त 11:51 से 12:45 तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए उपयुक्त है। विजय मुहूर्त दोपहर 2:32 से 3:25 तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:57 से 7:19 तक रहेगा।

हालांकि, राहुकाल दोपहर 3:38 से शाम 5:19 तक रहेगा, इस दौरान किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए। यमगंड और गुलिक काल में भी सावधानी बरतना उचित माना गया है।

आस्था और सेवा का संदेश
बड़ा मंगल हमें केवल पूजा करने का ही नहीं, बल्कि सेवा और दान के महत्व को भी समझाता है। इस दिन लोग भंडारे आयोजित कर भूखे लोगों को भोजन कराते हैं, शीतल पेय वितरित करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिर तक सीमित नहीं होती, बल्कि मानव सेवा में भी ईश्वर का वास होता है।

अंततः, बड़ा मंगल 2026 भक्ति, श्रद्धा और परोपकार का अद्भुत अवसर है। इस दिन हनुमानजी की आराधना कर हम अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं और कठिनाइयों से मुक्ति पा सकते हैं। जय बजरंगबली!

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