Monday, 7 Sep 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > बछ बारस 2026: गोवत्स द्वादशी का महत्व, पूजा विधि और कथा
व्रत और त्योहार

बछ बारस 2026: गोवत्स द्वादशी का महत्व, पूजा विधि और कथा

दिव्यसुधा
Last updated: September 7, 2026 11:40 am
दिव्यसुधा
Share
बछ बारस पर गाय और बछड़े की पूजा करती महिला
बछ बारस पर गौ माता और बछड़े की पूजा का पावन दृश्य
SHARE

हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उनकी सेवा व पूजा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। बछ बारस, जिसे गोवत्स द्वादशी भी कहा जाता है, गाय और उसके बछड़े के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना से व्रत रखती हैं। वर्ष 2026 में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की बछ बारस 7 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार द्वादशी तिथि 7 सितंबर शाम 5:03 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर दोपहर 2:42 बजे तक रहेगी। प्रदोषकाल में पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

क्यों रखा जाता है बछ बारस का व्रत?
बछ बारस पर गाय और बछड़े की पूजा कर महिलाएं अपनी संतान के मंगल और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत और गौ पूजा से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यह पर्व केवल एक व्रत नहीं, बल्कि गौ माता के प्रति सम्मान, सेवा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।

बछ बारस पर चाकू से कटी चीजें क्यों नहीं खाते?
बछ बारस की एक विशेष परंपरा है कि इस दिन चाकू से कटी हुई सब्जियां या फल नहीं खाए जाते। कई परिवारों में इस दिन चाकू और कैंची का इस्तेमाल करने से भी परहेज किया जाता है। इसके पीछे एक प्रसिद्ध लोककथा जुड़ी है। कथा के अनुसार, एक बहू से भूलवश बछड़े को काटकर पकाने की गलती हो गई। बाद में उसने बछ बारस माता से श्रद्धापूर्वक प्रार्थना की। माता की कृपा से बछड़ा पुनः जीवित हो गया। इसी लोकमान्यता के कारण इस दिन किसी जीव को काटने का प्रतीक माने जाने वाले चाकू से भोजन काटने से भी परहेज किया जाता है।

बछ बारस पर क्या खाएं और किन चीजों से बचें?

  • इस दिन भोजन को लेकर भी विशेष नियम माने जाते हैं।
  • गेहूं और गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता।
  • चाकू से कटी हुई सब्जियों और फलों से परहेज किया जाता है।
  • भोजन में चना, मोठ, बाजरा, ज्वार, अंकुरित अनाज और बेसन से बने व्यंजन शामिल किए जाते हैं।
  • अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में कुछ भिन्नता हो सकती है।

बछ बारस की पूजा विधि
बछ बारस के दिन श्रद्धालु महिलाएं प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद गाय और बछड़े की विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

  • गाय और बछड़े को स्नान कराकर उनका श्रृंगार करें।
  • माथे पर हल्दी-कुमकुम और रोली लगाएं तथा अक्षत अर्पित करें।
  • दीप और धूप जलाकर पूजा करें।
  • फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।
  • गाय और बछड़े को गुड़, चना या मीठा चारा खिलाएं।
  • बछ बारस की कथा का श्रवण करें और भगवान से संतान के मंगल की प्रार्थना करें।
  • शाम को पुनः पूजा करने के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
  • यदि घर के आसपास गाय और बछड़ा उपलब्ध न हो, तो कई स्थानों पर मिट्टी से गाय-बछड़े की आकृति बनाकर या उनके चित्र की पूजा करने की परंपरा भी है।

बछ बारस की पौराणिक कथा
बछ बारस से जुड़ी एक पौराणिक कथा नंदिनी गाय से संबंधित है। मान्यता है कि नंदिनी कामधेनु की दिव्य पुत्री थीं और उनकी कृपा से ऋषियों की मनोकामनाएं पूर्ण होती थीं। कथा के अनुसार, एक स्त्री से गोसेवा और गो-संरक्षण से संबंधित अपराध हो गया, जिसके कारण उसे अपने पुत्र से वियोग सहना पड़ा। अपने अपराध पर उसे गहरा पश्चाताप हुआ। तब देवताओं की प्रेरणा से उसने गोवत्स द्वादशी का व्रत किया और श्रद्धापूर्वक गौ माता की पूजा की। व्रत और पूजा के प्रभाव से उसे अपने पुत्र की पुनः प्राप्ति हुई। इसी मान्यता के कारण बछ बारस का व्रत आज भी संतान की रक्षा, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है।

TAGGED:Bach Baras 2026Bach Baras PujaBach Baras Puja VidhiBach Baras VratCow WorshipGau MataGovatsa DwadashiGovatsa Dwadashi KathaHindu VratSanatan Dharma
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article 7 सितंबर 2026 सोमवार का दैनिक राशिफल और सभी 12 राशियों का भविष्यफल 7 सितंबर 2026 राशिफल: मेष से मीन तक जानें आज का राशिफल
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

रक्षाबंधन 2026 पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन
व्रत और त्योहार

रक्षाबंधन 2026: 28 अगस्त राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और समय

By दिव्यसुधा
आदि शंकराचार्य जयंती 2025
व्रत और त्योहार

आदि शंकराचार्य जयंती 2025: जानें तिथि, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
मासिक शिवरात्रि व्रत पूजा – शिवलिंग अभिषेक व आराधना
व्रत और त्योहार

मासिक शिवरात्रि व्रत: महत्व, पूजा विधि और शुभ समय

By दिव्यसुधा
सोम प्रदोष व्रत और रवि योग के दिन भगवान शिव की पूजा करते हुए भक्त
व्रत और त्योहार

शुभ संयोग: सोम प्रदोष व्रत और रवि योग का महत्व भगवान शिव की कृपा का अद्भुत अवसर

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?