उतर प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें अयोध्या सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा प्रस्तुत बजट में अयोध्या में पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री पर्यटन स्थल विकास योजना के तहत 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना और तीर्थयात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है।
सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि बजट में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले तीर्थयात्रा मार्गों को मजबूत किया जाएगा और पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
मुख्य मार्ग ‘राम पथ’ का निर्माण लगभग पूर्ण
श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंच मार्ग परियोजना के अंतर्गत अयोध्या में मुख्य पहुंच मार्ग ‘राम पथ’ का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। यह मार्ग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगा और शहर की यातायात व्यवस्था को भी बेहतर बनाएगा। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से अयोध्या को एक विश्वस्तरीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकार का लक्ष्य अयोध्या को विश्वस्तरीय धामिर्क पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित करना है। इसके तहत सड़कों, आवागमन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन , होटल और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। राम मंदिर से जुड़ी मुख्य सड़क ‘राम पथ’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्य भी इसी योडना का हिस्सा है। इससे ऐने वाले समय में श्रद्लुओं और पर्यटकों की संख्या और तेजी से बढ़ाने की संभावना है।
धार्मिक स्थलों के विकास हेतु सरकार की नई पहल
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके तहत उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से नैमिषारण्य क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना विकास के लिए 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसी प्रकार, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अंतर्गत मथुरा में भी विकास कार्यों का प्रस्ताव रखा गया है ताकि ब्रज क्षेत्र में तीर्थयात्रा और पारिवारिक पर्यटन को मजबूती मिल सके।
बजट में विंध्यवासिनी देवी धाम और वाराणसी में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे वाराणसी-मिर्ज़ापुर क्षेत्र एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में और अधिक मजबूत होगा। इन प्रावधानों से तीर्थयात्रियों, परिवारों और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी, सुविधाओं और यात्रा अनुभव में सुधार होने की उम्मीद है।
आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। 2025 के दौरान राज्य में करोड़ों श्रद्धालु पहुंचे, जिससे साफ है कि लोगों की आस्था और धार्मिक यात्रा की रुचि लगातार बढ़ रही है। सरकार इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं पर जोर दे रही है ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
इस बजट का एक बड़ा उद्देश्य रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड, स्थानीय दुकानदार, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार की योजना है कि पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और गांवों तक आर्थिक लाभ पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अयोध्या और अन्य धार्मिक शहरों में निवेश से पूरे उत्तर प्रदेश के पर्यटन सेक्टर को नई पहचान मिलेगी। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। साथ ही यह विकास राज्य को आर्थिक रूप से भी मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह बजट उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अयोध्या समेत कई पवित्र स्थलों के विकास से आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।