Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025: जानिए योग की शुरुआत, इतिहास और आज की ज़रूरत क्यों बना ये प्राचीन अभ्यास!
अन्य

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025: जानिए योग की शुरुआत, इतिहास और आज की ज़रूरत क्यों बना ये प्राचीन अभ्यास!

दिव्यसुधा
Last updated: June 21, 2025 10:52 am
दिव्यसुधा
Share
SHARE

हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि योग आखिर शुरू कहां से हुआ था? सिर्फ आसन और कसरत नहीं, योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ती है। यह न सिर्फ तन को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी शांत और सतर्क करता है।

योग: शब्द से साधना तक
‘योग’ शब्द संस्कृत के ‘युज’ धातु से निकला है, जिसका अर्थ है जोड़ना या एकत्र करना। योग सिर्फ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं रहा—यह जैन, बौद्ध, और दुनिया के कई हिस्सों जैसे चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण एशिया, और अब तो पूरे विश्व में फैल चुका है। आज के समय में योग एक ग्लोबल हेल्थ मूवमेंट बन चुका है।

योग का इतिहास: जब कोई धर्म नहीं था
ऐसा माना जाता है कि योग की उत्पत्ति हजारों साल पहले हुई थी, जब न कोई धर्म था, न विश्वास। आदियोगी शिव को योग का प्रथम प्रवर्तक माना जाता है, जिन्होंने सप्तऋषियों को योग विद्या प्रदान की थी। ये ऋषि इस गूढ़ ज्ञान को लेकर विभिन्न महाद्वीपों में गए, लेकिन भारत में इसे सबसे अधिक गहराई और विस्तार मिला।

सिंधु सभ्यता से लेकर उपनिषदों तक
योग की प्राचीनता के प्रमाण सिंधु घाटी की मुहरों और जीवाश्मों में भी मिलते हैं, जिनमें योगासन में बैठे व्यक्ति दर्शाए गए हैं। योग की झलक हमें वैदिक ग्रंथों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत, बौद्ध और जैन परंपराओं में भी देखने को मिलती है। यह सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शैली रही है।

पतंजलि का योगदान: योग को मिला नया आकार
हालांकि योग की परंपरा बहुत पुरानी है, लेकिन महर्षि पतंजलि ने इसे पहली बार व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने अपने योग सूत्रों में योग की व्याख्या की और इसे दर्शन के रूप में स्थापित किया। उनके बाद भी अनेक योग गुरुओं और ऋषियों ने इसके प्रचार-प्रसार और विकास में योगदान दिया।

सूर्य नमस्कार और प्राचीन अनुष्ठान
वैदिक काल में सूर्य उपासना को प्रमुखता दी गई थी, जिससे सूर्य नमस्कार जैसी परंपराएं जन्मी। प्राणायाम और ध्यान भी वैदिक यज्ञ और अनुष्ठानों का हिस्सा रहे हैं। उस समय योग सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, आध्यात्मिक साधना का हिस्सा हुआ करता था।

धर्म से परे है योग
आज भी कई लोग यह सोचते हैं कि योग किसी विशेष धर्म से जुड़ा है। लेकिन सच्चाई यह है कि योग किसी धर्म, जाति या संप्रदाय तक सीमित नहीं है। यह एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य है शरीर, मन और आत्मा का संतुलन। कोई भी व्यक्ति—चाहे किसी भी पंथ या देश से हो—योग के अभ्यास से लाभ उठा सकता है।

आधुनिक जीवन में योग का महत्व

  1. प्राणायाम: श्वास की शक्ति
    प्राचीन भारत की यह तकनीक आज वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है कि यह तनाव, चिंता और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं में राहत देती है। प्राणायाम के ज़रिए हम न सिर्फ अपनी सांसों पर नियंत्रण पाते हैं, बल्कि दिमाग में स्पष्टता और संतुलन भी आता है।
  2. ध्यान: मन की दवा
    आज की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में ध्यान यानी मेडिटेशन मन को स्थिर करने का सबसे प्रभावशाली उपाय है। यह नींद से भी अधिक गहराई वाला आराम देता है, एकाग्रता बढ़ाता है और आतंरिक ऊर्जा को पुनर्जीवित करता है।

योग दिवस: एक वैश्विक पहल
भारत सरकार के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया, जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 से हुई। तब से हर साल करोड़ों लोग इस दिन एक साथ योग करते हैं—चाहे वो पार्क हो, स्कूल, ऑफिस या घर। यह न केवल एक कार्यक्रम बन चुका है, बल्कि मानवता को जोड़ने का एक आध्यात्मिक माध्यम बन चुका है।

योग सिर्फ व्यायाम नहीं, जीवन दर्शन है
आज जब पूरा विश्व तनाव, बीमारी और असंतुलन से जूझ रहा है, तब योग हमें सिखाता है—कैसे जियें, न कि सिर्फ कैसे बचें। योग एक ऐसी कुंजी है, जो हमें भीतर से मजबूत बनाकर बाहर की दुनिया में संतुलन सिखाती है।

तो इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आप भी शुरुआत करें—चाहे 10 मिनट का प्राणायाम हो या कुछ देर का ध्यान—क्योंकि “जो खुद से जुड़ता है, वही दुनिया को बेहतर बनाता है।”

TAGGED:yog divasअंतरराष्ट्रीय योग दिवसअंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025योग का इतिहासयोग की शुरुआत
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article यह तस्वीर घर में धन स्थिरता के लिए वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा में तिजोरी, श्री यंत्र और भगवान कुबेर की स्थापना दर्शाती है। घर की ये घटनाएं देती है संकेत, समय रहते हो जाएं सावधान
Next Article रविवार के दिन करें उपाय, दूर होंगी धन से जुड़ी सभी समस्याएं
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

दीपावली उत्सव में लाल किले पर जलते हुए दीये और आतिशबाजी
अन्य

दिवाली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल – भारत की वैश्विक पहचान

By दिव्यसुधा
सफेद मोती और चांदी की अंगूठी से चंद्रमा को मजबूत करने का ज्योतिषीय उपाय
अन्य

सफेद मोती की चांदी की अंगूठी: चंद्रमा मजबूत करने का शुभ ज्योतिषीय उपाय

By दिव्यसुधा
अन्य

Assessing the Diplomatic Challenges and Global Security

By दिव्यसुधा
शास्त्रों के अनुसार रात के समय महिलाओं को किन कार्यों से बचना चाहिए
अन्य

रात के समय महिलाओं को किन कार्यों से बचना चाहिए – शास्त्रीय नियम

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?