गणेश चतुर्थी के दस दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। 2025 में यह तिथि 8 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन एक ओर जहां गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन होता है, वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु अनंत शेषनाग पर विराजमान रहते हैं। इन्हीं के कारण यह पर्व “अनंत चतुर्दशी” कहलाता है। अग्नि पुराण में इसका विस्तार से वर्णन है।
कौन हैं भगवान अनंत?
चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर विश्राम करते हैं।
इन्हें अनंत इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका न आदि है, न अंत।
वामन अवतार में भगवान ने मात्र दो पग में तीनों लोक नाप लिए थे।
इनके पूजन से जीवन के कष्ट और संकट दूर होकर सुख-समृद्धि आती है।
क्यों मनाते हैं अनंत चतुर्दशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षभर में छह विशेष चतुर्थियों का महत्व है, जिनमें अनंत चतुर्दशी का विशेष स्थान है। मान्यता है कि यदि किसी के जीवन में सबकुछ होते हुए भी संकट और परेशानियां बनी रहती हैं, तो अनंत चतुर्दशी का व्रत उनके जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव लाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी पांडवों को इस व्रत का महत्व समझाया था। जब पांडव जुए में सब कुछ हार गए थे, तो श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा, जिससे उन्हें पुनः राजपाट और वैभव प्राप्त हुआ।
पूजा विधि – कैसे करें भगवान अनंत की पूजा?
प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल पर कलश और भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें।
अष्टदल कमल रूपी पात्र में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करें।
कच्चे धागे को हल्दी, केसर और कुमकुम से रंगकर अनंत सूत्र बनाएं, जिसमें 14 गांठें होनी चाहिए।
भगवान विष्णु की षोडशोपचार पूजा करें और मंत्र का जाप करें –
“अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।
पूजा के बाद अनंत सूत्र को बांध लें –
पुरुष दाहिने हाथ में
महिलाएं बाएं हाथ में
अनंत सूत्र का महत्व
अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधना इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसमें 14 गांठें होती हैं।
प्रत्येक गांठ भगवान विष्णु के एक-एक नाम का प्रतीक है – अनंत, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुण्ठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद। इसे धारण करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह धागा जीवन से संकट दूर करता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
अनंत सूत्र बांधने की विधि
कच्चे धागे में 14 गांठ लगाकर उसे दूध में डुबोकर “ॐ अनंताय नमः” मंत्र का जाप करें।
पूजा कर इसे धारण करें।
व्रत के दौरान 14 दिनों तक सात्विक आहार ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
अनंत सूत्र से जुड़ी कथा
कहा जाता है कि कौंडिल्य ऋषि ने जब अपनी पत्नी के बाजू पर अनंत सूत्र देखा तो उन्होंने इसे जादू-टोना मानकर उतारकर जला दिया। इसके बाद उन्हें भारी दुखों का सामना करना पड़ा।
जब अपनी भूल का एहसास हुआ, तो उन्होंने 14 वर्षों तक भगवान अनंत की कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पुनः सुख-समृद्धि प्रदान की।
इसी तरह सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र और पांडवों को भी इस व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि और राजपाट प्राप्त हुआ था।
अनंत सूत्र बांधने के फायदे
जीवन में संकट और कष्टों का अंत होता है।
व्यक्ति को धन, संतान और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
जीवन में खोई हुई वस्तुएं या परिस्थितियां पुनः प्राप्त होती हैं।
पितृ दोष और ग्रह दोष से मुक्ति मिलती है।
यह धागा भगवान विष्णु की कृपा का प्रतीक है।
अनंत सूत्र का अपमान न करें
शास्त्रों में कहा गया है कि इस सूत्र का अनादर नहीं करना चाहिए। यह केवल धागा नहीं, बल्कि भगवान अनंत का आशीर्वाद है। इसे उतारकर फेंकना या अपमान करना अशुभ माना जाता है।
अनंत चतुर्दशी केवल गणेश विसर्जन का दिन नहीं है, बल्कि यह भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना का विशेष पर्व है। इस दिन व्रत करके और अनंत सूत्र बांधकर व्यक्ति जीवन के हर संकट से उबर सकता है।
यदि आप भी 2025 में जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और संतोष पाना चाहते हैं, तो इस दिन अनंत व्रत अवश्य करें और अनंत सूत्र धारण कर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।