हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों में अपरा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आता है और भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा, नियम और भक्ति भाव से व्रत करने से व्यक्ति के जीवन के दुख-दर्द समाप्त होते हैं और सुख, समृद्धि तथा शांति की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा, जिसे अचला एकादशी भी कहा जाता है।
पूजा विधि और भक्ति का महत्व
इस दिन भक्त प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करते हैं। पूरे दिन भक्ति, जप और ध्यान के माध्यम से भगवान का स्मरण किया जाता है। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है और मन को शांति प्राप्त होती है।
आरती का विशेष महत्व
धार्मिक परंपराओं में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक आरती न की जाए। इसलिए अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और एकादशी माता की आरती करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। आरती के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मकता दूर होती है और भक्त को मानसिक शांति प्राप्त होती है।
एकादशी माता की आरती
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी…॥
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी…॥
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी…॥
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥
विजया फागुन कृष्णपक्ष में, शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी…॥
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी…॥
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी, अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी…॥
योगिनी नाम आषाढ़ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा, आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी…॥
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्विन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी…॥
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी…॥
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती, पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी…॥
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी, दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरुदत्ता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥