भारत की आध्यात्मिक धरा रहस्यमयी और अद्भुत मंदिरों से भरी हुई है। कहीं पहाड़ों की चोटियों पर देवालय बसे हैं, तो कहीं गुफाओं के भीतर दिव्य शक्तियों का निवास माना जाता है। लेकिन राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक मंदिर अपनी अनोखी बनावट और रहस्यमयी आस्था के कारण विशेष पहचान रखता है। यह मंदिर जमीन पर नहीं, बल्कि 65 फीट गहरे कुएं के भीतर स्थित है।
सीकर के तबेला मार्केट में स्थित यह प्राचीन मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां भक्तों को दर्शन करने के लिए जमीन के भीतर गोलाकार सीढ़ियों से उतरना पड़ता है। जैसे-जैसे श्रद्धालु नीचे पहुंचते हैं, उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो वे किसी दूसरी ही आध्यात्मिक दुनिया में प्रवेश कर रहे हों। चारों ओर शांति, दिव्यता और भक्ति का अद्भुत वातावरण मन को गहरे सुकून से भर देता है।
100 साल पुरानी आध्यात्मिक विरासत
इस मंदिर का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उस समय सीकर क्षेत्र में पानी की भारी कमी थी। तब रावराजा कल्याण ने तबेला क्षेत्र में कुएं की खुदाई के लिए भूमि प्रदान की थी। इसके बाद प्रसिद्ध व्यापारी सेठ मोरारका ने इस कुएं का निर्माण करवाया।
कहा जाता है कि जब कुएं की खुदाई चल रही थी, तभी यहां एक दिव्य मूर्ति प्राप्त हुई। लोगों ने इसे भगवान की विशेष कृपा माना और उसी स्थान पर मूर्ति की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। धीरे-धीरे यहां हनुमान जी के साथ भगवान शिव, विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गईं। समय बीतने के साथ यह स्थान एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र बन गया।
राजा-महाराजाओं की भी रही आस्था
मंदिर के महंत पाराशर नाथ महाराज बताते हैं कि पहले उनके पिता यहां पूजा करते थे और अब वे स्वयं वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस मंदिर की प्रसिद्धि इतनी दूर तक फैली कि पुराने समय में राजा-महाराजा भी यहां दर्शन करने आया करते थे। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त करते हैं।
65 फीट नीचे जाकर होते हैं दर्शन
इस मंदिर की सबसे विशेष बात यह है कि यहां प्रतिदिन 65 फीट नीचे उतरकर पूजा की जाती है। संकरी गोलाकार सीढ़ियों से नीचे पहुंचने के बाद भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं। मंदिर में एक समय में केवल एक ही व्यक्ति दर्शन कर सकता है, जिससे वहां का शांत और दिव्य वातावरण बना रहता है।
यहां अखंड रामायण पाठ की परंपरा भी निरंतर निभाई जाती है। भक्तों का मानना है कि धरती के भीतर स्थित इस मंदिर में पहुंचकर उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति का अनुभव होता है। यही कारण है कि यह अनोखा मंदिर आज राजस्थान की सबसे रहस्यमयी और पवित्र धरोहरों में गिना जाता है।