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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > उज्जैन में स्थित अनोखा और विशेष मंदिर, जहां बिना किसी मुहूर्त के भी विवाह संपन्न कराए जाने की परंपरा है
मंदिर

उज्जैन में स्थित अनोखा और विशेष मंदिर, जहां बिना किसी मुहूर्त के भी विवाह संपन्न कराए जाने की परंपरा है

दिव्यसुधा
Last updated: April 28, 2026 2:50 pm
दिव्यसुधा
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उज्जैन स्थित चिंतामन गणेश मंदिर का दृश्य, प्राचीन हिंदू मंदिर परिसर और श्रद्धालुओं की भीड़।
चिंतामन गणेश मंदिर, उज्जैन का एक प्राचीन और पवित्र मंदिर, जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने और बिना मुहूर्त विवाह की परंपरा प्रसिद्ध है।
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चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन का एक बहुत ही प्रसिद्ध और प्राचीन धार्मिक स्थल है। यह मंदिर क्षिप्रा नदी के पार उज्जैन–फतेहाबाद मार्ग पर स्थित है। इसे श्रद्धालु बहुत पवित्र स्थान मानते हैं और यहां बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां भगवान गणेश को “चिंतामन गणेश” के रूप में पूजा जाता है, जिसका अर्थ होता है—जो सभी चिंताओं और परेशानियों को दूर करते हैं।

चिंतामन गणेश मंदिर का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर परमार काल (लगभग 9वीं से 12वीं शताब्दी) में अस्तित्व में था। समय के साथ यह मंदिर काफी पुराना और जीर्ण-शीर्ण हो गया था। बाद में 18वीं शताब्दी में इंदौर की महान शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। उन्होंने केवल इसी मंदिर का नहीं, बल्कि उज्जैन और अन्य कई तीर्थ स्थलों का भी विकास और पुनरुद्धार किया था। आज जो मंदिर दिखाई देता है, वह उन्हीं के प्रयासों का परिणाम माना जाता है।

वनवास के दौरान भगवान श्रीराम यहां आए थे और  भगवान गणेश की पूजा की थी

इस मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम अपने वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण के साथ यहां आए थे, तब उन्होंने भगवान गणेश की पूजा की थी। कहा जाता है कि यहां पूजा करने के बाद भगवान श्रीराम को अपनी सभी चिंताओं से मुक्ति मिली थी। इसी कारण इस स्थान पर विराजमान गणेश जी को “चिंतामन गणेश” कहा जाने लगा। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती और मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं।

गणेश मंदिर की सबसे खास बात यहां की स्वयंभू गणेश प्रतिमा है

चिंतामन गणेश मंदिर की सबसे खास बात यहां की स्वयंभू गणेश प्रतिमा है। माना जाता है कि यह प्रतिमा किसी इंसान द्वारा बनाई नहीं गई, बल्कि प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश के तीन रूपों के दर्शन माने जाते हैं। पहला रूप “चिंतामन” है, जो चिंताओं को दूर करता है। दूसरा “इच्छामन” है, जो भक्तों की इच्छाओं को पूरा करता है। तीसरा रूप “सिद्धिविनायक” है, जो सिद्धि और सफलता प्रदान करता है। इन तीनों रूपों के दर्शन भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शक्ति देते हैं।

इस मंदिर से कई परंपराएं और मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। एक परंपरा के अनुसार, भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की आशा में गर्भगृह की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है और आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि यहां बिना किसी विशेष मुहूर्त के विवाह कराए जा सकते हैं। इसी वजह से यह मंदिर विवाह के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।

मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन बावड़ी भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण लक्ष्मण जी ने किया था। यह मान्यता इस स्थान को और भी पवित्र बना देती है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह मंदिर बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर गणेश चतुर्थी के समय यहां बड़ा मेला लगता है। इस अवसर पर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं और भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। पूरा मंदिर परिसर भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। कहा जाए तो चिंतामन गणेश मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आस्था, इतिहास और संस्कृति का सुंदर संगम है। यह मंदिर लोगों को यह विश्वास देता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से हर चिंता दूर हो सकती है और जीवन में शांति व सफलता मिल सकती है।

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