नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है। चैत्र नवरात्रि 2026 में यह पावन दिन 24 मार्च, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन देवी की उपासना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से मां कात्यायनी की पूजा करता है, उसे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप
मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी, ओजस्वी और प्रभावशाली माना गया है। उनकी चार भुजाएं हैं। बाईं ओर की ऊपरी भुजा में वे तलवार धारण करती हैं, जो अधर्म और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है, जो पवित्रता और शांति का संकेत देता है। दाईं ओर की ऊपरी भुजा अभय मुद्रा में होती है, जिससे वे भक्तों को निर्भयता का आशीर्वाद देती हैं, जबकि नीचे वाली भुजा वरमुद्रा में होती है, जो भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति का प्रतीक है। उनका वाहन सिंह है, जो साहस, शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
पूजा का शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व
24 मार्च 2026 को मां कात्यायनी की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक रहेगा। इन शुभ समयों में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि उनकी कृपा से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन को शांत एवं पवित्र रखें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और माता को रोली, अक्षत, धूप तथा पीले या लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। फिर मां को शहद या पीले रंग के हलवे का भोग लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ देवी कात्यायन्यै नमः” मंत्र का जाप करें। अंत में मां की आरती करें और प्रसाद को परिवार में बांट दें।
मां कात्यायनी का प्रिय भोग और शुभ रंग
मां कात्यायनी को शहद अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन शहद का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा पीले रंग के हलवे का भोग भी चढ़ाया जाता है। यह भोग व्यक्ति के जीवन में आकर्षण, सौंदर्य और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इस दिन पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये रंग उत्साह, ऊर्जा और शक्ति के प्रतीक हैं।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने मां भगवती की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उनका नाम कात्यायनी पड़ा। आगे चलकर जब असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त किया। इस कारण उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। यह कथा हमें यह संदेश देती है कि जब भी अधर्म बढ़ता है, तब दैवीय शक्ति उसका अंत करने के लिए अवतरित होती है।
मां कात्यायनी के मंत्र और आध्यात्मिक महत्व
मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त करने के लिए “कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी, नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः” मंत्र का जाप अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इसके साथ ही “या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता” स्तुति मंत्र का पाठ भी किया जाता है। इन मंत्रों के जप से मन शुद्ध होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में साहस, श्रद्धा और संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। वे शक्ति, भक्ति और धर्म की प्रतीक हैं। उनकी उपासना से न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है, बल्कि आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त होता है। नवरात्रि का यह दिन हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और उसे सही दिशा में उपयोग करने की प्रेरणा देता है।