Sunday, 22 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > भगवान > मां कूष्मांडा: सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा की अधिष्ठात्री देवी
भगवान

मां कूष्मांडा: सृष्टि की रचयिता और ऊर्जा की अधिष्ठात्री देवी

Ekta Mishra
Last updated: March 21, 2026 12:49 pm
Ekta Mishra
Share
मां कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप और नवरात्रि पूजा
मां कूष्मांडा: सृष्टि और ऊर्जा की अधिष्ठात्री देवी
SHARE

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार ही अंधकार था और कहीं भी जीवन का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और सृजन की देवी कहा जाता है। ‘कूष्मांडा’ शब्द का अर्थ है वह देवी, जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड को उत्पन्न किया।

मां कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और प्रकाशमय माना जाता है। वे अष्टभुजा धारी हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा सुशोभित रहते हैं, जबकि आठवें हाथ में जपमाला होती है। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा का निवास सूर्य मंडल के भीतर है, जहां वे अपनी दिव्य ऊर्जा से सृष्टि को संचालित करती हैं। उनमें सूर्य की प्रचंड ऊर्जा को सहन करने की अद्भुत क्षमता है, जो उनके अद्वितीय तेज को दर्शाती है।

पूजा का महत्व और लाभ
मां कूष्मांडा की आराधना से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उनकी कृपा से रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं तथा आयु, यश, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से यह स्वरूप संतान सुख प्रदान करने वाला माना गया है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से मां की उपासना करते हैं, उन्हें तेज, ज्ञान, प्रेम, ऊर्जा और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां कूष्मांडा की कृपा से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं।

पूजा विधि और मंत्र
नवरात्रि के चौथे दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मां को हरी इलायची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित किया जाता है। इसके बाद “ॐ कूष्मांडा देव्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। साथ ही, “सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्त पद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥” मंत्र का जप भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कूष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। उनकी पूजा करने से बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति की बुद्धि, वाणी और निर्णय क्षमता में सुधार आता है। बुध को सुदृढ़ करने के लिए अपनी उम्र के बराबर हरी इलायची अर्पित कर “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है।

भोग और विशेष उपाय
मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। इसके बाद उस प्रसाद को ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और बुद्धि का विकास होता है। इसके अलावा पीले रंग की मिठाई या फल का भोग भी अर्पित किया जा सकता है।

आध्यात्मिक संदेश
मां कूष्मांडा की आराधना हमें यह संदेश देती है कि छोटी-सी सकारात्मक ऊर्जा भी जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उनकी भक्ति से न केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। इस प्रकार, नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

TAGGED:Durga Pujamaa kushmandanavratri fourth dayकूष्मांडा देवीकूष्मांडा मंत्रदेवी पूजानवरात्रि चौथा दिननवरात्रि पूजानवरात्रि महत्वमां कूष्मांडामां दुर्गा स्वरूप
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article मनीप्लांट का वास्तु महत्व और घर में सकारात्मक ऊर्जा मनीप्लांट का वास्तु महत्व: सही दिशा में लगाने से बढ़ती है सुख-समृद्धि
Next Article मां कूष्मांडा देवी की आरती और दिव्य भक्ति मां कूष्मांडा देवी की आरती: भक्ति और ऊर्जा का दिव्य संचार
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

पशुपतिनाथ अवतार
भगवान

जानिए भगवान शंकर को क्यों लेना पड़ा था पशुपतिनाथ अवतार?

By दिव्यसुधा
बाल हनुमान द्वारा सूर्य को फल समझकर आकाश में उड़ान, इंद्र के वज्रप्रहार और देवताओं द्वारा वरदान प्राप्त करने का चित्रण
भगवान

हनुमान नामकरण की दिव्य कथा: बाललीला, वज्रप्रहार और देववरदान

By दिव्यसुधा
featuredभगवानमंदिर

रक्षाबंधन पर खुलने वाला रहस्यमयी वंशी नारायण मंदिर – 364 दिन बंद, सिर्फ एक दिन खुलते हैं पट

By दिव्यसुधा
चैत्र नवरात्र 2026 से पहले घर की सफाई करते श्रद्धालु और Durga की पूजा की तैयारी
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

चैत्र नवरात्र 2026: मां दुर्गा के आगमन से पहले घर से हटा दें ये चीजें

By Ekta Mishra
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?