Wednesday, 18 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का महत्व और सही समय
अन्य

चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का महत्व और सही समय

Ekta Mishra
Last updated: March 17, 2026 11:17 am
Ekta Mishra
Share
चैत्र नवरात्रि में विधि-विधान से कलश स्थापना करते हुए श्रद्धालु
नवरात्रि में शुभ मुहूर्त पर की गई कलश स्थापना से मिलता है मां दुर्गा का आशीर्वाद
SHARE

चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर कलश स्थापना को विशेष महत्व दिया गया है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि शक्ति उपासना की शुरुआत का प्रतीक भी है। मान्यता है कि कलश में समस्त देवताओं का वास होता है, इसलिए इसकी स्थापना विधि-विधान और सही समय पर करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

क्यों शाम के समय कलश स्थापना वर्जित मानी जाती है
अक्सर विद्वान प्रदोषकाल यानी सूर्यास्त के बाद के समय में कलश स्थापना करने से मना करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रदोषकाल दिन और रात का संधि समय होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय तामसिक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं, जबकि कलश स्थापना एक सात्विक और दैवीय प्रक्रिया है। ऐसे समय में स्थापना करने से पूजा का पूर्ण फल मिलने में बाधा आ सकती है।

शास्त्रों में दिन के मुहूर्त का महत्व
हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी भी शुभ कार्य या नई शुरुआत के लिए सुबह का समय और ‘अभिजीत मुहूर्त’ सबसे उत्तम माना गया है। प्रदोषकाल को मुख्य रूप से भगवान शिव की आराधना और दीपदान के लिए श्रेष्ठ माना गया है, लेकिन ‘आवाहन’ जैसे कार्यों के लिए यह समय उपयुक्त नहीं होता।

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि यदि प्रतिपदा तिथि सूर्यास्त के बाद भी बनी रहती है, तब भी कलश स्थापना अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करनी चाहिए। यह नियम जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के सही संचालन के लिए बनाया गया है।

सुबह के समय कलश स्थापना के लाभ
सुबह के समय जब भक्त श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कलश स्थापित करते हैं, तो सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिलता है। इस समय वातावरण शांत और मन स्थिर होता है, जिससे पूजा अधिक प्रभावी बनती है। इससे घर में पूरे दिन भक्ति का वातावरण बना रहता है और नकारात्मकता दूर होती है।

कलश स्थापना का मुख्य उद्देश्य घर में सुख, शांति और समृद्धि लाना होता है। इसलिए इसे ऐसे समय पर करना चाहिए, जब ऊर्जा सकारात्मक हो और मन पूर्ण रूप से एकाग्र हो सके।

आध्यात्मिक लाभ और मां दुर्गा की कृपा
कलश स्थापना के बाद कृतज्ञता भाव से पूजा करना और मां दुर्गा का आभार व्यक्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

अंततः कहा जा सकता है कि सही मुहूर्त में की गई कलश स्थापना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन लाने का भी माध्यम बनती है। मां दुर्गा की कृपा से घर-परिवार में मंगल और खुशहाली बनी रहती है।

TAGGED:chaitra navratriDurga Pujahindu festivalHindu TraditionsKalash SthapanaNavratri 2026Navratri Puja VidhiPuja MuhuratReligious BeliefsSpiritual Rituals
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article आज का राशिफल सभी राशियों के लिए – मेष से मीन तक दैनिक भविष्यफल
Next Article चैत्र नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा करते श्रद्धालु चैत्र नवरात्र 2026: तिथि, मुहूर्त, नवदुर्गा और पूजन विधि
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

गुप्त नवरात्र 2026 में रातों की साधना और दुर्लभ तांत्रिक उपाय
अन्य

गुप्त नवरात्र 2026: रातों में किए जाने वाले दुर्लभ उपाय और सिद्धियों की महिमा

By दिव्यसुधा
अन्य

Catching Every Beat of World News as it Happens

By दिव्यसुधा
vishnu ji
अन्य

एक राजा को हुआ भगवान विष्णु का दर्शन

By दिव्यसुधा
दान-पुण्य का महत्व और सुपात्र-कुपात्र की पहचान – आध्यात्मिक ज्ञान
अन्य

दान-पुण्य का महत्व: सुपात्र को दान क्यों आवश्यक है?

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?