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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार >  जानिए चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होगा? पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना से होगा आरंभ
व्रत और त्योहार

 जानिए चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होगा? पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना से होगा आरंभ

दिव्यसुधा
Last updated: March 11, 2026 12:51 pm
दिव्यसुधा
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चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना करते श्रद्धालु
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होती है नौ दिनों की देवी उपासना।
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चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत पवित्र पर्वों में से एक है। यह पर्व शक्ति की उपासना और आध्यात्मिक साधना का विशेष समय माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च, गुरुवार से प्रारंभ होकर 27 मार्च, शुक्रवार तक मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही विधिवत पूजन की शुरुआत होती है और मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है।


कलश स्थापना से शुरू होती है नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि का पहला दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाती है। इसे घटस्थापना भी कहा जाता है। कलश को शुभता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करके कलश स्थापित किया जाता है और उसके पास जौ बोए जाते हैं। यह परंपरा पूरे नौ दिनों तक चलती है और नवरात्रि के अंत में जौ की वृद्धि को शुभ संकेत माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की आध्यात्मिक साधना आरंभ हो जाती है। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं, देवी मंत्रों का जप करते हैं और मंदिरों में जाकर माता की आराधना करते हैं।


पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है, इसलिए इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यही देवी पिछले जन्म में सती थीं, जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मां शैलपुत्री को शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इनकी पूजा से जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ (बैल) है और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है।

भक्ति और साधना का विशेष पर्व

चैत्र नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर माना जाता है। इन नौ दिनों में लोग सात्विक भोजन करते हैं, मन और विचारों को पवित्र रखने का प्रयास करते हैं और देवी की आराधना में लीन रहते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कई स्थानों पर रामायण पाठ और देवी जागरण भी आयोजित होते हैं। श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिरों में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और देवी से सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना करते हैं।

नौ दिनों तक होती है देवी के नौ स्वरूपों की आराधना

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की क्रमशः पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ स्वरूपों की पूजा से भक्तों को शक्ति, ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही कारण है कि चैत्र नवरात्रि को अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व माना जाता है।


आस्था और शक्ति का प्रतीक है नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि भारतीय संस्कृति और आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह पर्व हमें भक्ति, संयम और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। नौ दिनों तक देवी की उपासना करने से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस वर्ष भी 19 मार्च से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्रि में भक्त पूरे उत्साह और भक्ति भाव से मां दुर्गा की आराधना करेंगे।

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