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दिव्य सुधा > अन्य > शीतला अष्टमी 2026: बसौड़ा पर्व का महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम
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शीतला अष्टमी 2026: बसौड़ा पर्व का महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम

Ekta Mishra
Last updated: March 11, 2026 12:44 pm
Ekta Mishra
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शीतला अष्टमी 2026 पर माता शीतला की पूजा और बसौड़ा के ठंडे प्रसाद का भोग
शीतला अष्टमी 2026: बसौड़ा पर्व पर माता शीतला को चढ़ाया जाता है ठंडा प्रसाद।
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हिंदू धर्म में शीतला माता को आरोग्य, स्वच्छता और रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। हर वर्ष शीतला अष्टमी का पावन पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष 2026 में यह पवित्र पर्व 11 मार्च, बुधवार को मनाया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता शीतला की श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा मिलती है। यही कारण है कि भारत के कई हिस्सों में इस दिन विशेष भक्ति और आस्था के साथ माता की पूजा की जाती है। शीतला अष्टमी को ‘बसौड़ा’ पर्व के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन माता को एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।

शीतला अष्टमी के दिन क्या करें

शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। सबसे पहले, माता को बासी या एक दिन पहले बना हुआ सात्विक भोजन भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। इसी परंपरा के कारण इस पर्व को ‘बसौड़ा’ कहा जाता है। इस दिन घर में राबड़ी, दही, पुआ, चावल या अन्य ठंडे पकवान माता को अर्पित किए जाते हैं और बाद में इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

इस दिन घर और मंदिर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि जहां स्वच्छता होती है, वहीं देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए शीतला अष्टमी के दिन घर को स्वच्छ और पवित्र रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

पूजा के समय माता शीतला को शीतल जल अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद उस जल की कुछ बूंदें पूरे घर में छिड़कने की परंपरा भी है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आरोग्य का वास होता है।

इसके अलावा इस दिन जरूरतमंद लोगों को ठंडा भोजन, फल या शीतल जल का दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दान-पुण्य करने से माता की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

शीतला अष्टमी के दिन क्या न करें

शीतला अष्टमी के दिन कुछ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इस दिन घर में चूल्हा या आग जलाना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए इस दिन नया भोजन बनाने से बचना चाहिए और केवल ठंडे भोजन का ही सेवन करना चाहिए।

इसके साथ ही इस दिन गर्म भोजन करने से भी परहेज करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन सुई-धागे का काम, सिलाई-बुनाई या कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग करना भी अशुभ माना जाता है।

इसके अलावा इस दिन सिर धोना भी वर्जित बताया गया है। साथ ही तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन करने से भी बचना चाहिए। इस दिन सात्विकता और संयम का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

शीतला अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 मार्च 2026 को सुबह 01:54 बजे से होगा और इसका समापन 12 मार्च 2026 को सुबह 04:19 बजे तक रहेगा। वहीं पूजा के लिए शुभ समय सुबह 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक माना गया है।

इस प्रकार शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और सात्विक जीवन शैली का संदेश देने वाला पावन अवसर भी है। इस दिन श्रद्धापूर्वक माता शीतला की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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