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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > बुगरड़ा का वीर हनुमान मंदिर: आस्था, चमत्कार और परंपरा का जीवंत केंद्र
मंदिर

बुगरड़ा का वीर हनुमान मंदिर: आस्था, चमत्कार और परंपरा का जीवंत केंद्र

Ekta Mishra
Last updated: February 10, 2026 4:37 pm
Ekta Mishra
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बुगरड़ा गांव वीर हनुमान मंदिर – पश्चिममुखी प्रतिमा और 500 वर्ष पुराना कैर वृक्ष
बुगरड़ा गांव के वीर हनुमान मंदिर में 500 वर्ष पुरानी प्रतिमा और पवित्र परंपराएँ
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राजस्थान के नागौर जिले को हनुमान भक्ति की भूमि कहा जाता है। यहां अनेक प्राचीन और सिद्ध हनुमान मंदिर स्थित हैं, लेकिन बुगरड़ा गांव में स्थित वीर हनुमान मंदिर अपनी विशिष्ट मान्यताओं और अद्भुत परंपराओं के कारण भक्तों के बीच एक अलग पहचान रखता है। यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कार का ऐसा संगम है, जो पीढ़ियों से लोगों के विश्वास को मजबूत करता आया है।

स्वयंभू पश्चिममुखी हनुमान प्रतिमा की मान्यता
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां विराजमान भगवान हनुमान की पश्चिममुखी स्वयंभू प्रतिमा है। मान्यता है कि यह प्रतिमा लगभग 500 वर्ष पूर्व भूमि से स्वयं प्रकट हुई थी। पश्चिममुखी हनुमान प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और इसे विशेष रूप से शक्तिशाली तथा संकट निवारक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फलित होती है और जीवन के कठिन संकट दूर होते हैं।

प्लेग महामारी से जुड़ा चमत्कार
ग्रामीणों और बुजुर्गों के अनुसार, एक समय जब नागौर और आसपास के क्षेत्रों में प्लेग महामारी का भीषण प्रकोप फैला हुआ था, तब बुगरड़ा गांव इस आपदा से लगभग सुरक्षित रहा। लोगों का मानना है कि यह चमत्कार वीर हनुमान जी की कृपा से ही संभव हुआ। इसी घटना के बाद से इस मंदिर को “वीर हनुमानजी” के नाम से जाना जाने लगा और इसकी मान्यता और भी गहरी होती चली गई।

500 वर्ष पुराना कैर का वृक्ष
मंदिर परिसर में आज भी लगभग 500 वर्ष पुराना कैर का विशाल वृक्ष खड़ा है, जो इस स्थान की प्राचीनता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह वृक्ष सदियों से मंदिर और यहां आने वाले भक्तों का साक्षी रहा है। श्रद्धालु इस वृक्ष को भी आस्था की दृष्टि से देखते हैं और इसे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ मानते हैं।

विवाह से जुड़ी अनोखी परंपरा
वीर हनुमान मंदिर से जुड़ी एक अनूठी परंपरा इसे और भी विशेष बनाती है। ब्राह्मण समाज में यह मान्यता है कि विवाह से पूर्व नवविवाहित जोड़े को मंदिर की परिक्रमा कराई जाती है। विश्वास किया जाता है कि इस परिक्रमा से दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है।

हवेली जैसी वास्तुकला और दिव्य वातावरण
वास्तुकला की दृष्टि से भी बुगरड़ा का वीर हनुमान मंदिर अत्यंत आकर्षक है। इसकी बनावट किसी प्राचीन हवेली जैसी प्रतीत होती है। पत्थर और चूने से बनी बारीक कारीगरी मंदिर को एक अलग ही दिव्यता प्रदान करती है। यहां पहुंचते ही भक्तों को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

मंदिर तक पहुंचने का मार्ग
यदि आप वीर हनुमान मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह नागौर–डीडवाना बाईपास से मात्र 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां आकर पश्चिममुखी वीर हनुमान जी के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

बुगरड़ा गांव का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, चमत्कार और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है, जो आज भी भक्तों के जीवन में विश्वास और शक्ति का संचार करता है।

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