मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में स्थित श्री सिद्धनाथ महादेव मंदिर न केवल एक प्राचीन शिवालय है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और रहस्यमयी मान्यताओं का जीवंत केंद्र भी है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यह मंदिर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से भर जाता है और पूरे क्षेत्र में शिव भक्ति की विशेष ऊर्जा का अनुभव होता है। लगभग 375 वर्ष पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां साल में केवल एक बार, महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव के शयन दर्शन कराए जाते हैं, जो इसे देश के अनोखे शिव मंदिरों में स्थान दिलाते हैं।
375 वर्ष पुराना मंदिर और गहरी आस्था की जड़ें
श्री सिद्धनाथ महादेव मंदिर को खरगोन के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि इसकी स्थापना सन 1651 में मल्लिवाल परिवार द्वारा की गई थी। तब से लेकर आज तक यह मंदिर शहर के अधिष्ठाता देव बाबा सिद्धनाथ महादेव के रूप में पूजे जाते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही आस्था और मंदिर से जुड़ी चमत्कारिक मान्यताओं ने इस धाम को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया है। महाशिवरात्रि पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति भाव से गूंजता रहता है।
ब्रह्म मुहूर्त में खुलते हैं पट, विशेष श्रृंगार आरती
महाशिवरात्रि के दिन मंदिर की दिनचर्या अत्यंत विशेष होती है। मंदिर समिति के अनुसार, इस पावन दिन मंदिर के पट तड़के 3 बजे खोल दिए जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा सिद्धनाथ महादेव की विशेष श्रृंगार आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं। इसके बाद सुबह से लेकर शाम तक लगातार अभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजन-अर्चन का क्रम चलता रहता है। भक्त बाबा से नगर की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
दूल्हा रूप में सजते हैं बाबा, भव्य महाआरती
शाम के समय मंदिर का स्वरूप और भी दिव्य हो जाता है। बाबा सिद्धनाथ महादेव का विशेष श्रृंगार किया जाता है और उन्हें दूल्हा रूप में सजाया जाता है। साफा, आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार के साथ बाबा का यह रूप भक्तों को भावविभोर कर देता है। रात करीब 8:30 बजे भव्य महाआरती होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होकर “हर हर महादेव” के जयकारों के साथ बाबा की आराधना करते हैं। इसके बाद वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार साबूदाना खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जाता है।
साल में एक बार शयन दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य
श्री सिद्धनाथ महादेव मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि से जुड़ी है। ठीक रात 12 बजे भक्तों को बाबा के शयन दर्शन कराए जाते हैं। इस दौरान भगवान शिव को शयन अवस्था में विराजमान किया जाता है। मान्यता है कि इन दर्शन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। दिनभर महिलाएं बिलास की बत्ती जलाकर और भजन-कीर्तन के माध्यम से बाबा की आराधना करती हैं।