तमिलनाडु का मयिलाडुथुराई जिला अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इसी जिले में स्थित मयुरानाथस्वामी मंदिर (जिसे पदीथुराई विश्वनाथर मंदिर भी कहा जाता है) भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र मंदिर है। यह मंदिर कावेरी नदी के तट पर बसा हुआ है और अपनी अद्भुत नक्काशी, स्थापत्य कला और पौराणिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा से जुड़ा महत्व
इस मंदिर से जुड़ी एक दिव्य कथा भक्तों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मोर (मयूर) का रूप धारण कर इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी। उनकी गहन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और ‘मयुरानाथस्वामी’ के रूप में पूजित हुए। इसी कथा के कारण इस स्थान का नाम पड़ा मयिलाडुथुराई, जिसका अर्थ है — “मोर का नृत्य स्थल”।
इस पौराणिक प्रसंग के कारण यह स्थान भक्तों के लिए श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां पूरे विश्वास और भक्ति से पूजा करता है, उसके पापों का नाश होता है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
मंदिर की दिव्यता और स्थापत्य कला
मयुरानाथस्वामी मंदिर चोल और पांड्य कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर का विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) और गर्भगृह की भव्यता दर्शकों को आकर्षित करती है। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और देव मूर्तियाँ उस काल की कलात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ प्रतीत होता है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव पदीथुराई विश्वनाथर के रूप में और माता पार्वती अबयांबिके के स्वरूप में विराजमान हैं। भक्तजन यहां दीपक जलाकर और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आस्था और धार्मिक मान्यता
यह मंदिर न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे दक्षिण भारत के शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहां नियमित रूप से महाशिवरात्रि, नवरात्रि, और अन्य प्रमुख उत्सवों का भव्य आयोजन होता है। उन अवसरों पर हजारों श्रद्धालु इस पवित्र भूमि पर आकर पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जो भक्त सच्चे मन से यहां भगवान मयुरानाथस्वामी और माता अबयांबिके की आराधना करते हैं, उन्हें जीवन में सुख, समृद्धि और वैवाहिक सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र
कावेरी नदी के किनारे स्थित यह मंदिर अपने शांत वातावरण के कारण ध्यान और साधना के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। भक्त यहां आने के बाद आध्यात्मिक शांति और मन की स्थिरता का अनुभव करते हैं। मयुरानाथस्वामी मंदिर न केवल दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का रत्न है, बल्कि यह भक्ति, प्रेम और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक भी है। जो भी श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन के लिए आता है, वह आत्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव किए बिना नहीं लौटता।