हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन गोपाष्टमी का पवित्र पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण की गौ-सेवा और गौ-प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में पहली बार गायों को चराना शुरू किया था। इसीलिए इस दिन गौ माता की पूजा और सेवा करने का विशेष महत्व होता है।
गोपाष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक शुक्ल अष्टमी तिथि 29 अक्टूबर 2025, बुधवार सुबह 9:23 बजे से प्रारंभ होकर 30 अक्टूबर, गुरुवार सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को मानते हुए गोपाष्टमी का पर्व 30 अक्टूबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा – सुबह 06:35 बजे से 07:57 बजे तक। इस समय गायों की सेवा और पूजन करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं।
गोपाष्टमी की कथा और महत्व
कथा के अनुसार, जब श्रीकृष्ण केवल छह वर्ष के थे, तब उन्होंने माता यशोदा से कहा “मां, अब मैं बड़ा हो गया हूं, अब मैं केवल बछड़े नहीं, बल्कि गायों को चराने जाऊंगा।” यशोदा मैया ने बात टालते हुए कहा कि पहले नंद बाबा से पूछ लो। जब कृष्ण नंद बाबा के पास पहुंचे, तो उन्होंने कहा, “बाबा, मुझे गौ माता के साथ वन में जाना है।” नंद बाबा ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन अंत में श्रीकृष्ण की हठ के आगे झुकना पड़ा। उन्होंने पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकलवाया, और उसी दिन श्रीकृष्ण ने पहली बार गायों को चराने की शुरुआत की।उस दिन कार्तिक मास की शुक्ल अष्टमी थी, और तभी से इस तिथि को “गोपाष्टमी” कहा जाने लगा।
पूजा विधि और फल
इस दिन प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गायों को स्नान कराकर फूल, अक्षत, गुड़ और हरी घास अर्पित करें। उनके चरण स्पर्श करें और “गायत्री मंत्र” या “गो माता की आरती” का पाठ करें। भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए गायों की परिक्रमा करें और दान करें। जो व्यक्ति सच्चे मन से गोपाष्टमी के दिन गौ माता की पूजा करता है, उसे न केवल भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की भी वृद्धि होती है।