मृत्युंजय महाकाल की आरती में भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का वर्णन है। यह आरती भक्तों के भय और दुखों को दूर करने में सहायक मानी जाती है। इसमें त्रिपुंडधारी, त्रिपुरारी शिव को तीनों लोकों का दिगपाल बताते हुए उनकी कृपा का गुणगान किया गया है।
शिवजी की कई आरतियां प्रसिद्ध हैं लेकिन उनके मृत्युंजय महाकाल स्वरूप की आरती ‘काल की विकराल की, त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की’ आरती बेहद शक्तिशाली मानी गई है। माना जाता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के भय और दुख दूर करते हैं। इसमें त्रिपुंडधारी त्रिपुरारी शिव की महिमा का गुणगान किया गया है। उन्हें तीनों लोकों का दिगपाल बताया गया है।
काल की विकराल की, त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की,
भोले शिव कृपाल की, करो रे मंगल आरती।
मृत्युंजय महाकाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, बाबा महाकाल की।
ओ मेरे महाकाल की, करो रे मंगल आरती।
मृत्युंजय महाकाल की…
पित पुष्प बाघम्बर धारी, नंदी तेरी सवारी,
त्रिपुंडधारी हे त्रिपुरारी, भोले भव भयहारी।
शंभु दिन दयाल की, तीन लोक दिगपाल की,
कैलाषी शशिभाल की, करो रे मंगल आरती।
मृत्युंजय महाकाल की…
डमरू बाजे डम डम डम, नाचे शंकर भोला,
बम भोले शिव बमबम बमबम, चढ़ा भंग का गोला।
जय जय हृदय विशाल की, आशुतोष प्रतिपाल की,
नैना धक धक ज्वाल की, करो रे मंगल आरती।।
मृत्युंजय महाकाल की…
आरत हरि पालनहारी, तू है मंगलकारी,
मंगल आरती करे नर नारी, पाएं पदारथ चारि।
कालरूप महाकाल की, कृपासिंधु महाकाल की,
उज्जैनी महाकाल की, करो रे मंगल आरती।।
मृत्युंजय महाकाल की…
काल की विकराल की, त्रिलोकेश्वर त्रिकाल की,
भोले शिव कृपाल की, करो रे मंगल आरती।
मृत्युंजय महाकाल की, करो रे मंगल आरती,
मृत्युंजय महाकाल की, बाबा महाकाल की।।
मृत्युंजय महाकाल की…
करो रे मंगल आरती, मृत्युंजय महाकाल की।।