सनातन धर्म में कार्तिक अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का पर्व भी कहा जाता है, जब घर-घर में दीप प्रज्ज्वलित कर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
कार्तिक अमावस्या तिथि और समय:
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर शाम 3 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर शाम 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत और दान का पुण्य कार्य 21 अक्टूबर को किया जाएगा।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त:
शास्त्रों में बताया गया है कि कार्तिक अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान और दान अक्षय पुण्य का फल देता है। इस वर्ष सुबह 4:44 से 5:35 तक का समय स्नान-दान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से नकारात्मक ऊर्जाएं समाप्त होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
कार्तिक अमावस्या के उपाय:
यदि आप अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो इस दिन तुलसी की माला से 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। यह उपाय धनवृद्धि, आत्मबल और मानसिक शांति प्रदान करता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और समृद्धि आती है।
पूजा विधि:
प्रातःकाल स्नान कर घर और मंदिर की साफ-सफाई करें। भगवान गणेश जी की आराधना से पूजा प्रारंभ करें। इसके बाद भगवान विष्णु का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। दीपक जलाकर वातावरण को पवित्र करें और श्री विष्णु चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती और भोग लगाकर प्रभु से क्षमा प्रार्थना करें।
कार्तिक अमावस्या का यह दिन आत्मशुद्धि, दान और भक्ति के माध्यम से जीवन में प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।