करवा चौथ का व्रत हर साल सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस बार करवा चौथ 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। लेकिन इस बार का करवा चौथ थोड़ा अलग है, क्योंकि पूजा के समय एक अशुभ योग – व्यतीपात योग बन रहा है। ऐसे में कई महिलाएं असमंजस में हैं कि क्या इस योग में पूजा करनी चाहिए या नहीं। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार सही समय और उपाय।
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल करवा चौथ की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 57 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। यह समय प्रदोष काल में आता है, जो पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। व्रती महिलाओं को लगभग 1 घंटे 14 मिनट का शुभ समय पूजा के लिए प्राप्त होगा। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि व्यतीपात योग इससे पहले ही लग जाएगा, जो इस बार चर्चा का विषय बना हुआ है।
करवा चौथ पर व्यतीपात योग का प्रभाव
पंचांग के अनुसार, व्यतीपात योग 10 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर दोपहर 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। यानी करवा चौथ की पूजा के दौरान यह योग सक्रिय रहेगा।
हिंदू ज्योतिष में व्यतीपात योग को अशुभ और विघ्नकारक माना गया है। इस योग में गृह प्रवेश, विवाह, सगाई, या नया व्यापार शुरू करने जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इस योग के दौरान मानसिक बेचैनी, विवाद और अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। लेकिन क्या इस कारण से करवा चौथ की पूजा नहीं करनी चाहिए? इसका जवाब है नहीं। पूजा तभी की जा सकती है, जब विधि और भाव दोनों सही हों।
व्यतीपात योग में भी मिल सकता है शुभ फल
हालांकि व्यतीपात योग को सामान्यत: अशुभ कहा गया है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार, यह योग पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। इस समय दान, जप, ध्यान और शिव पूजा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं।
व्यतीपात योग के देवता रुद्र (शिव) और यमराज हैं, जबकि इसके अधिष्ठाता ग्रह राहु हैं। ऐसे में इस योग में शिव पूजा और रुद्राभिषेक करने से हर प्रकार की बाधा और दोष दूर होते हैं। इसलिए यदि करवा चौथ की पूजा इस योग के दौरान पड़ रही है, तो भगवान शिव-पार्वती की आराधना करना अत्यंत शुभ रहेगा।
करवा चौथ पूजा की विधि
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह स्नान कर निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। दिन भर व्रत रखने के बाद सूर्यास्त के बाद चंद्र दर्शन कर पूजा संपन्न की जाती है। पूजा के दौरान भगवान गणेश, माता गौरी, भगवान शिव और चंद्र देव की आराधना की जाती है। इस बार चूंकि व्यतीपात योग रहेगा, इसलिए पूजा के समय शिव मंत्रों का जाप करना बेहद लाभकारी रहेगा, जैसे – “ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जप। यह राहु दोष को शांत करने के साथ परिवार में सुख-शांति और वैवाहिक सौहार्द को भी बढ़ाता है।
क्या करें और क्या न करें
करें:
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
रुद्र मंत्रों और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दें।
मन और वाणी पर संयम रखें।
न करें:
किसी से विवाद या कटु वाणी का प्रयोग न करें।
नया कार्य या निवेश शुरू न करें।
नकारात्मक विचार या तनाव से दूर रहें।
करवा चौथ का व्रत एक अनुष्ठान होने के साथ प्यार, आस्था और विश्वास का प्रतीक है। व्यतीपात योग के बावजूद, अगर आप श्रद्धा और संयम के साथ पूजा करें, तो यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाएगा। इस योग में शिव परिवार की पूजा करने से सभी दोषों की शांति होती है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है। इसीलिए कहा गया है “श्रद्धा से किया गया कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाता।” इस करवा चौथ पर, मन की शुद्धता और प्रेम के साथ भगवान शिव-पार्वती की आराधना करें वही सबसे बड़ा शुभ फल देगा।