करवाचौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। महिलाएं इसे अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए निर्जला व्रत के रूप में करती हैं। साथ ही इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में भी खुशियां बनी रहती हैं। यह व्रत महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण और कठोर माना जाता है।
करवा चौथ व्रत कब है
इस वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 9 अक्टूबर रात 10:55 बजे शुरू होकर 10 अक्टूबर शाम 7:39 बजे तक रहेगी। इसलिए करवाचौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस बार व्रत पर सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो इसे और अधिक फलदायी बनाता है। साथ ही, चंद्रमा वृषभ राशि में विराजमान होंगे, जिससे व्रत करने वालों के लिए गौरी-गणेश की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। इस पूजा से न केवल सौभाग्य में वृद्धि होती है, बल्कि पति की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि भी बनी रहती है।
इन बातों का रखें ख्याल महिलाएं
- करवाचौथ के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन किसी से वाद-विवाद या नकारात्मक विचार न करें।
- इस दिन सफेद, काले और नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचें। सोलह श्रृंगार करके सजना चाहिए।
- इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें और शाम को मां गौरी की उपासना करें।
- रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
- इस दिन निर्जला उपवास करना अनिवार्य है इसलिए कुछ भी खाएं या पीएं नहीं।
- यह व्रत पति की लंबी उम्र और घर में सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
करवाचौथ के दिन इन चीजों का दान
करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाओं को केसर, सिंदूर, लाल चुनरी, इत्र आदि का दान करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और शांति बनी रहती है। साथ ही पति-पत्नी के बीच विश्वास और सामंजस्य बढ़ता है और घर में खुशहाली एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।