Wednesday, 6 May 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > इंदिरा एकादशी 2025: शिवलिंग पूजन का रहस्य और विष्णु व्रत का महत्व
व्रत और त्योहार

इंदिरा एकादशी 2025: शिवलिंग पूजन का रहस्य और विष्णु व्रत का महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: September 16, 2025 12:26 pm
दिव्यसुधा
Share
इंदिरा एकादशी 2025
इंदिरा एकादशी 2025
SHARE

इंदिरा एकादशी 2025: हिंदू पंचांग में साल भर कुल 24 एकादशियाँ आती हैं और हर एकादशी भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित मानी जाती है। लेकिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का महत्व बाकी सभी एकादशियों से अलग है। इसका कारण है – यह तिथि पितृपक्ष के दौरान आती है। इस दिन न केवल भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, बल्कि शिवलिंग पूजन का भी विशेष महत्व होता है। यही वजह है कि भक्तों के मन में सवाल उठता है कि आखिर विष्णु व्रत में शिव की आराधना क्यों जुड़ गई?

विष्णु व्रत में क्यों जुड़ा शिव पूजन?
धर्मशास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितृदोष से मुक्ति के लिए केवल भगवान विष्णु की उपासना पर्याप्त नहीं मानी गई। गरुड़ पुराण और पद्म पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा करने से व्रत का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भगवान विष्णु को मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। वहीं भगवान शिव को पितृनाथ यानी पितरों का स्वामी कहा गया है। यानी पितरों को तृप्त करने का कार्य भगवान विष्णु की कृपा से होता है, जबकि पितृदोष से मुक्ति का मार्ग भगवान शिव की कृपा से ही खुलता है। यही कारण है कि इंदिरा एकादशी पर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है।

भगवान शिव और भगवान विष्णु का गहरा संबंध
हिंदू धर्मग्रंथों में शिव और विष्णु को एक-दूसरे का पूरक बताया गया है। कोई भी साधना पूरी नहीं मानी जाती जब तक इन दोनों देवताओं की आराधना साथ न की जाए। भगवान विष्णु उपासना जीवन में समृद्धि, भक्ति और मोक्ष का मार्ग खोलती है। भगवान शिव उपासना पितरों के आशीर्वाद, दोष निवारण और मानसिक शांति प्रदान करती है। इसलिए इंदिरा एकादशी को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा से जोड़कर देखा गया है।

पितृपक्ष और इंदिरा एकादशी का महत्व
पितृपक्ष वह काल है जब व्यक्ति अपने पूर्वजों को याद करता है, श्राद्ध और तर्पण के माध्यम से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता है। इंदिरा एकादशी इसी काल में आती है और इसे पितृमोक्षदिनी कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है, साथ ही परिवार के जीवन से आर्थिक संकट और मानसिक क्लेश दूर होते हैं।

पूजा-विधि: कैसे करें इंदिरा एकादशी का पूजन
इंदिरा एकादशी का व्रत और पूजन विधिवत करने से ही इसके फल मिलते हैं। शास्त्रों में जो विधि बताई गई है, वह इस प्रकार है:

  • सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें तुलसी दल, पीले फूल और फल अर्पित करें।
  • इसके बाद शिवलिंग अभिषेक करें। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराएँ।
  • बेलपत्र, धतूरा और भस्म चढ़ाएँ।
  • पितरों के लिए तर्पण करें और उन्हें जल अर्पित करें।
  • अंत में जरूरतमंदों को अन्न, कपड़े और दान दें।

क्यों है यह पूजा ज़रूरी?
शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि केवल व्रत रखने से ही पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती। जब तक शिवलिंग पर जल और बेलपत्र नहीं चढ़ाए जाते, तब तक पितृदोष का निवारण अधूरा माना जाता है। इसीलिए इंदिरा एकादशी का महत्व अन्य एकादशियों से कहीं अधिक है।

पौराणिक संदर्भ
पुराणों में कई कथाएँ आती हैं, जिनमें इंदिरा एकादशी व्रत से पितरों को मुक्ति मिलने का वर्णन है। गरुड़ पुराण के अनुसार, एक बार नल नामक राजा के पितरों की आत्मा दुख में थी। उन्होंने इंदिरा एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु-शिव दोनों की आराधना की। इसके फलस्वरूप उनके पितरों को स्वर्गलोक में स्थान मिला और परिवार पर से पितृदोष समाप्त हो गया।

इंदिरा एकादशी व्रत के लाभ
इस व्रत को करने से कई तरह के फल मिलते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • पितरों की आत्मा को शांति मिलती है
  • पितृदोष का निवारण होता है।
  • घर में समृद्धि और शांति आती है।
  • परिवार को संतान सुख मिलता है।
  • जीवन में आने वाले आर्थिक संकट दूर होते हैं।

आधुनिक संदर्भ में इंदिरा एकादशी
आज की व्यस्त जीवनशैली में कई लोग परंपराओं को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन इंदिरा एकादशी जैसे व्रत हमें यह याद दिलाते हैं कि हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना कितना जरूरी है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार की जड़ों से जुड़ने और आध्यात्मिक शांति पाने का मार्ग भी है।

रहस्य और संदेश
इंदिरा एकादशी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि यह व्रत केवल विष्णु पूजा तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें बताता है कि शिव और विष्णु दोनों की कृपा से ही जीवन संतुलित और पूर्ण हो सकता है। जहां भगवान विष्णु मोक्ष देते हैं, वहीं भगवान शिव पितृदोष से मुक्ति दिलाते हैं। इसीलिए इस तिथि पर दोनों देवताओं की संयुक्त आराधना का विधान है।

इंदिरा एकादशी 2025 सिर्फ एक व्रत नहीं है, यह एक आध्यात्मिक अवसर है। यह तिथि हमें पूर्वजों को याद करने, उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने और जीवन में संतुलन लाने का संदेश देती है। इस दिन जब भक्त भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा करते हैं तो न केवल पितरों को तृप्ति मिलती है, बल्कि साधक को भी जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग मिलता है।

TAGGED:indira ekadashipanchangshivjivart tyoharvishnu jiसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article Vishwakarma Puja 2025 में पितृ पक्ष के दौरान नया वाहन खरीदने का महत्व” Vishwakarma Puja 2025: श्राद्ध पक्ष में नया वाहन खरीदना रहेगा शुभ या नहीं?
Next Article भगवान विश्वकर्मा :2025 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा का क्या है रहस्य ?
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

व्रत और त्योहार

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं भूलकर भी न करें ये गलतियां

By दिव्यसुधा
भगवान विश्वकर्मा :2025
व्रत और त्योहार

17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा का क्या है रहस्य ?

By दिव्यसुधा
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

पूजा में चप्पल-जूते क्यों वर्जित हैं? जानिए इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

By दिव्यसुधा
bhagwan vishnu
अन्य

गुरुवार के ये चमत्कारी उपाय करेंगे, तो घर रहेगा सुख-समृद्धि से भरा

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?