Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > करमा पर्व 2025: प्रकृति और भाई–बहन के रिश्ते को समर्पित आदिवासी उत्सव
व्रत और त्योहार

करमा पर्व 2025: प्रकृति और भाई–बहन के रिश्ते को समर्पित आदिवासी उत्सव

भाद्रपद शुक्ला एकादशी पर मनाया जाने वाला करमा पर्व प्रकृति, भाई–बहन और सामूहिकता का प्रतीक है

दिव्यसुधा
Last updated: September 3, 2025 2:55 pm
दिव्यसुधा
Share
करमा पर्व: परंपरा, प्रकृति और भाई–बहन के बंधन का पर्व
SHARE
Highlights
  • करमा पर्व: प्रकृति और भाई–बहन का अनोखा संगम
  • जवा बीज बोने और करम डाली पूजने की सदियों पुरानी परंपरा
  • प्रकृति, उर्वरता और पर्यावरण के प्रति आदिवासी आस्था

भाद्रपद माह की शुक्ला एकादशी (अगस्त–सितंबर) को हर साल आदिवासी समाज में करमा पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व करम देवता को समर्पित है, जो शक्ति, यौवन और प्रकृति की संजीवनी का प्रतीक माने जाते हैं। खेती-किसानी पर आधारित यह उत्सव आदिवासी जीवनशैली में प्रकृति के महत्व को उजागर करता है।

व्रत और रस्में: जवा बीज, करम डाली और सामूहिक पूजा
करमा पर्व की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। जवा बीज बोना: सात से नौ प्रकार के बीज (धान, जौ, गेहूं, मक्का आदि) को टोकरी में बोकर 7–9 दिनों तक उनका पालन किया जाता है। महिलाओं की भागीदारी: यह व्रत मुख्य रूप से अविवाहित लड़कियां करती हैं, जो भाई की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। करम वृक्ष की डाली: पूजा के दिन गांव के लोग—खासतौर पर युवतियां—जंगल से करम वृक्ष की डाली लाती हैं। डाली को दूध, सूखे फूल, प्रसाद और पारंपरिक पेय के साथ पूजकर गांव के बीच में लगाया जाता है।

कथाएँ और संदेश: सात भाइयों की कथा से प्रकृति सम्मान का सबक
इस पर्व के पीछे एक प्रसिद्ध कथा है— सात भाइयों की पत्नियां करम डाली के साथ गीत और नृत्य में व्यस्त थीं। भोजन देर से मिलने पर भाइयों ने क्रोधित होकर करम वृक्ष को नदी में फेंक दिया। परिणामस्वरूप, उनके जीवन में दुःख और अशांति आ गई। बाद में उन्होंने करम देवता की पूजा की और खुशहाली लौटी। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति का अनादर करने से नुकसान होता है और सम्मान व कृतज्ञता से जीवन में समृद्धि आती है।

करमा नृत्य और सामूहिक उत्सव
पूजा के बाद रात में करमा नाच का आयोजन होता है। गोल घेरे में नृत्य: पुरुष और महिलाएं ढोलक की थाप और लोकगीतों पर गोल घेरे में नृत्य करते हैं। सामुदायिक भोज: चावल की खीर, पारंपरिक शराब (हड़िया या हरिया) और अन्य स्थानीय पकवान प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं। डाली का विसर्जन: अगले दिन करम वृक्ष की डाली नदी या तालाब में विसर्जित की जाती है।

सामाजिक, पारिवारिक और पारिस्थितिक महत्व
भाई–बहन का बंधन: बहनें करमा व्रत रखकर अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। प्रकृति और खेती का सम्मान: करम वृक्ष की पूजा प्रकृति की उर्वरता और पर्यावरण संतुलन के प्रति आदिवासी समाज की गहरी आस्था दर्शाती है। सहयोग और समरसता: यह त्योहार आदिवासी समाज में सहयोग, भाईचारा और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देता है।

सांस्कृतिक एकता और आधुनिक स्वरूप
अब करमा पर्व का आयोजन सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्र: शहरों और शैक्षणिक संस्थानों में भी करमा पर्व मनाया जाने लगा है। उदाहरण: रांची में “करम अखाड़ा” जैसे कार्यक्रम होते हैं, जहां ढोल–वाद्य यंत्रों और स्थानीय कलाकारों के जरिए सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच मिलता है। पर्यावरण-मित्र रिवाज: आधुनिक स्वरूप में भी करमा पर्व अपनी जड़ों से जुड़ा है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।

करमा पर्व 2025: समाज को जोड़ने वाला उत्सव
करमा पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति-पूजा, पारिवारिक संबंध, सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक गौरव का संगम है। इस पर्व के जरिए आदिवासी समाज हमें यह सिखाता है कि प्रकृति और रिश्तों का सम्मान जीवन को समृद्ध और संतुलित बनाता है।

TAGGED:hanumankarmafestivalmandirrashifalvart tyoharvishnu jiसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article प्रत्येक दिन करें श्री दुर्गा चालीसा का पाठ, सब दुख दूर करेंगी जगदम्बा भवानी
Next Article पितृपक्ष और डबल ग्रहण: गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी का समय
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

भीष्म द्वादशी 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा और तिल तर्पण करते श्रद्धालु
व्रत और त्योहार

भीष्म द्वादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

By Ekta Mishra
मौन की शक्ति और ध्यान की सही प्रक्रिया | अध्यात्म से पाएं जीवन की सच्ची शांति
featuredसनातन धर्म

क्या है मौन की शक्ति और ध्यान की सही प्रक्रिया?

By दिव्यसुधा
hanuman ji
व्रत और त्योहार

हनुमान जन्मोत्सव, जानिए साल में दो बार क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती

By दिव्यसुधा
सफला एकादशी 2025 पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, गुरु बल और धन लाभ के ज्योतिषीय उपाय
व्रत और त्योहार

सफला एकादशी 2025: गुरु बल, धन-लाभ और विष्णु पूजा के उपाय

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?