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दिव्य सुधा > अन्य > पूजा में तिलक लगाने का सही तरीका और उसका धार्मिक महत्व
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पूजा में तिलक लगाने का सही तरीका और उसका धार्मिक महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: April 20, 2025 11:44 am
दिव्यसुधा
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tilak
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जब आप पूजा करते है या किसी पूजा में समिलित होते है तो अपने मस्तक पर तिलक अवश्य लगाते है मस्तक पर तिलक लगाना पूजा के दौरान की जाने वाली जरूरी परंपरा है यह हमारी संस्कृति और अध्यात्म से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी है, और तिलक लगाने से जीवन में सकारात्मकता आती है। यह आपके शरीर और मन को ऊर्जा से भर देता है। परन्तु तिलक लगाने का लाभ हमे तभी मिलता है जब आप इसे सही तरीके से मस्तक पर लगाते है। तो चलिए जानते हैं तिलक लगाते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

तिलक लगाने का सही नियम क्या है

  • स्नान करने के बाद ही मस्तक पर तिलक लगाना चाहिए, भूलकर भी स्नान के पूर्व तिलक नहीं लगाना चाहिए.
  • वहीं, तिलक सबसे पहले भगवान को लगाना चाहिए, फिर स्वंम के मस्तक पर.
  • इसके अलावा तिलक हमेशा अनामिका अंगुली से लगाएं.
  • तिलक रात में सोने से पहले मस्तक से हटा दीजिए. क्योंकि रात में माथे पर तिलक लगा कर सोने से आपकी एनर्जी नकारात्मकता में बदल सकती है.

तिलक लगाने के फायदे

  • तिलक आमतौर पर भौंहों के बीच, यानी ‘आज्ञा चक्र’ पर लगाया जाता है। यह स्थान हमारे मस्तिष्क का केंद्र होता है। चंदन, भस्म या कुमकुम से तिलक लगाने से इस स्थान पर ठंडक पहुंचती है, जिससे मन को शांति और तनाव से राहत मिलती है।
  • तिलक लगाने से मस्तिष्क की एकाग्रता शक्ति बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान, जप या पूजा के समय तिलक लगाने की परंपरा है। यह हमें मानसिक रूप से केंद्रित और स्थिर बनाता है।
  • ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि तिलक ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने का कार्य करता है। विशेष तिलकों जैसे केसर, चंदन या भस्म का प्रयोग करके आप अपनी कुंडली के दोषों को भी शांत कर सकते हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार, तिलक लगाने से भाग्य का उदय होता है। जब इसे श्रद्धा और विधिपूर्वक लगाया जाए, तो यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और कार्यों में सफलता दिलाने में सहायक होता है।
  • तिलक लगाने से न केवल मानसिक एकाग्रता मिलती है, बल्कि यह पूजा की पवित्रता का भी प्रतीक होता है। यह शरीर और आत्मा को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है, जिससे पूजा में मन लगता है।

तिलक कितने प्रकार के होते हैं –

  • चंदन का तिलक लगाने से एकाग्रता बढ़ती है, वहीं कुमकुम और रोली का तिलक आकर्षण बढ़ाता है और आलस्य को दूर करता है.
  • केसर के तिलक लगाने से यश, सम्मान और सफलता में वृद्धि करता है। केसर का तिलक शुभ कार्यों और विशेष अनुष्ठानों में लगाया जाता है।
  • गुरु ग्रह को प्रसन्न करने के लिए भी केसर का तिलक लगाया जाता है।
  • इसके अलावा अष्टगंध के तिलक से बुद्धि और ज्ञान में भी वृद्धि होती है. यह आपके मन को भी शुद्ध करता है.
  • भस्म का तिलक लगाने से नकारात्मक ऊर्जा और दुर्घटनाओं से रक्षा करता है। इसका शिव पूजन या ग्रह बाधा निवारण में प्रयोग होता है। भस्म का तिलक शनि, राहु और केतु की शांति के लिए उपयोगी होता है ।

यह भी कर सकते हैं – अगर आप सूर्य की स्थिति कुंडली में मजबूत करना चाहते हैं तो इसके लिए लाल चंदन, चंद्रमा के लिए सफेद, मंगल के लिए नारंगी, बुध के लिए अष्टगंध का तिलक, गुरु के लिए केसर, शुक्र के लिए रोली और शनि, राहु, केतु के लिए कंडे या धूप बत्ती की राख का तिलक लगा सकते हैं.

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