Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > Amalaki Ekadashi 2025 : आमलकी एकादशी के दिन क्यों होती है आंवले के पेड़ की पूजा
व्रत और त्योहार

Amalaki Ekadashi 2025 : आमलकी एकादशी के दिन क्यों होती है आंवले के पेड़ की पूजा

दिव्यसुधा
Last updated: March 8, 2025 8:16 am
दिव्यसुधा
Share
Amalaki Ekadashi
SHARE

हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण मानी गई है. हर महीने दो एकादशी व्रत पड़ते हैं. इस प्रकार एक वर्ष में एकादशी के 24 व्रत पड़ते हैं. एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित किया गया है. हर एकादशी के व्रत का अपना महत्व और लाभ है. फाल्गुन महीने में पड़ने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी होती है. इसे आमला एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु के व्रत और पूजन का विधान है. आमला एकादशी के दिन विष्णु जी व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश हो जाता है और जीवन के कष्ट और दुख दूर होते हैं। इस दिन विष्णु जी की पूजा के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा होती है. इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा शुभ मानी गई है। लेकिन इस दिन क्यों होती है आंवले के पेड़ की पूजा, आइए इसके बारे में जानते हैं.

कब है आमलकी एकादशी :-

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 9 मार्च को सुबह 7 बजकर 45 मिनट प्रारंभ होगी और एकादशी तिथि का समापन 10 मार्च 2025 को सुबह 07 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि मानी जाती है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा. वहीं व्रत के पारण का समय 11 मार्च को प्रातः 6 बजकर 35 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा.

कैसे शुरु हुई आंवले की पूजा की परंपरा :

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी को ये जानने की इच्छा हुई कि आखिर वो उत्पन्न कैसे हुए. ये जानने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या करना शुरू कर दिया. भगवान विष्णु उनके तपस्या से बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी को दर्शन दिए . विष्णु जी को देखकर ब्रह्मा जी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. ब्रह्मा जी की आंख से निकले आंसू श्री नारायण के चरणों में गिरे और उससे ही आंवले का पेड़ उत्पन्न हो गया.

इसके बाद श्री नारायण ने ब्रह्मा जी से कहा कि आज से वो आंवले के पेड़ में रहेंगे. जो भी भक्त आंवले के पेड़ की पूजा करेगा, उसको शुभ फल प्राप्त होगा और उसकी सभी इच्छाओं की पूर्ति होगी. ये सब फाल्गुन माह की एकादशी के दिन हुआ. तब से ही फाल्गुन माह की एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा की परंपरा शुरू हो गई. इस एकादशी के दिन आंवले की पूजा और परिक्रमा करने से मरने के बाद वैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है. वहीं गरुण पुराण में बताया गया है कि इस दिन माता लक्ष्मी के आंसुओं के आंवले का पेड़ उत्पन्न हुआ. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन जो भी आंवले के पेड़ की पूजा करता है उसके घर में धन का भंडार भरा रहता है. साथ ही उसे सभी एकादशी के व्रत का फल प्राप्त हो जाता है.

TAGGED:amalaki ekadashivart tyoharvishnu jiसनातन धर्म
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article lathmar holi Lathmar Holi : आज मनाई जाएगी ब्रज में लट्ठमार होली, जानिए कैसे शुरू हुई ये परम्परा
Next Article khatushyam Rangbahri Ekadashi 2025 : रंगभरी एकादशी के दिन खाटूश्याम मंदिर में होता है भव्य आयोजन
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

shiv ji
व्रत और त्योहार

प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा: भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर

By दिव्यसुधा
सूर्य और शुक्र का दुर्लभ संयोग 2025 – मकर, तुला और कुंभ राशि के लिए शुभ प्रभाव
featuredपंचांग

आज का पंचाग: 02 अगस्त 2025

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

हरियाली तीज: सुहाग और सौभाग्य के लिए रखा जाएगा निर्जला व्रत

By दिव्यसुधा
अन्य

रविवार के दिन करें उपाय, दूर होंगी धन से जुड़ी सभी समस्याएं

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?