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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > फुलेरा दूज के दिन, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
व्रत और त्योहार

फुलेरा दूज के दिन, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

दिव्यसुधा
Last updated: March 1, 2025 5:44 am
दिव्यसुधा
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radha krishn
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फुलेरा दूज का पर्व न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समाज में प्रेम और सौहार्द बढ़ाने का भी एक जरिया है. इस दिन का उल्लास और आनंद हर किसी के जीवन में खुशियां और सकारात्मकता लाता है.

सनातन धर्म में फुलेरा दूज बहुत ही खास पर्व माना जाता है इस दिन से सब होली की तयारियों में लग जाते है और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है. यह पर्व खासतौर से फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को लेकर लोगों के बीच विशेष उल्लास और श्रद्धा होती है. फुलेरा दूज के दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है, साथ ही इस दिन से होली की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं. आज यानी 1 मार्च 2025 को फुलेरा दूज मनाई जा रही है.

फुलेरा दूज का शुभ मुहूर्त :-
फुलेरा दूज का पर्व फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, जो 1 मार्च 2025 को प्रारंभ हो रही है. फुलेरा दूज की तिथि 1 मार्च यानी कल अर्धरात्रि में 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होगी और तिथि का समापन 2 फरवरी को रात 12 बजकर 09 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार फुलेरा दूज का पर्व 1 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन के लिए पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 6:47 बजे से लेकर 11:23 बजे तक है. यह समय पूजा के लिए विशेष रूप से आदर्श माना जाता है. फुलेरा दूज को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना समय देखे किया जा सकता है. चाहे वह विवाह, घर में प्रवेश या कोई अन्य शुभ कार्य हो, इस दिन कोई भी समय उपयुक्त होता है.

फुलेरा दूज का महत्व :-
फुलेरा दूज का पर्व प्रकृति की नई शुरुआत और जीवन की नयापन का प्रतीक है. फुलेरा दूज के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से न केवल वैवाहिक और प्रेम संबंधों में मधुरता आती है, बल्कि मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि का भी आगमन होता है. इस दिन की पूजा से व्यक्ति के समस्त कार्यों में सफलता और समृद्धि का वास होता है. यह दिन विशेष रूप से रिश्तों में सुधार और व्यक्तिगत सुख की प्राप्ति के लिए अहम माना जाता है.

पूजा विधि :-
फुलेरा दूज के दिन सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए. फिर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन श्री कृष्ण और राधा रानी की मूर्तियों को जल और पंचामृत से स्नान कराना चाहिए. साथ ही, पुष्प अर्पित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग फूलों की होली खेली थी. पूजा के बाद, श्री कृष्ण और राधा रानी की आरती करनी चाहिए और अंत में उन्हें खीर, माखन-मिश्री जैसे पकवानों का भोग अर्पित करना चाहिए. इस प्रकार से विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है.

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